भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) द्वारा रविवार को आराजीबाग स्थित शिक्षक सदन के भोला सिंह सभागार में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने ‘हासिमपुरा जैसी घटनाएं और उनका सबक’ विषय पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। लोगों ने घटना की पुन: विवेचना करने की मांग की।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि पूर्व आईपीएस अधिकारी विभूति नरायन राय ने कहा कि हासिमपुरा की घटना आजादी के बाद की सबसे बड़ी हिरासत में की गई हत्या है। 42 लोगों की हत्या में लचर विवेचना और मुख्य साजिशकर्ताओं को बचाकर जिन 19 लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया, उसे भी पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी किया जाना कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करती है।
इस प्रकरण पर पुन: विवेचना करके समयबद्ध सीमा में विशेष न्यायालय गठित करके लोकतंत्र, न्याय प्रणाली और धर्मनिरपेक्षता में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए उन चेहरों को भी न्यायालय के समक्ष लाने की जरूरत है, जो अभी तक बेनकाब नहीं हुए हैं। गोष्ठी के अंत में प्रस्ताव पारित करके हासिमपुरा की घटना की पुन: विवेचना करके समयबद्ध सीमा में विशेष न्यायालय गठित कर वास्तविक दोषियों को दंडित करने की मांग शासन से की गई।
इस मौके पर कामरेड जयप्रकाश नारायण, शंकर यादव, मसीउद्दीन संजरी, जीयालाल, वेद, इरफान अहमद, शमसाद अहमद, कल्वे हसन ने अपने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता कामरेड बीराम, रामराज और शफीक अहमद और संचालन सच्चिदानंद राय ने किया।