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Azamgarh News: कटाई-मड़ाई की धूल से बढ़े दमा और एलर्जी के मरीज

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जिला अस्पताल में मरीज देखते डॉ. आरके कुशवाहा। संवाद - फोटो : 1
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आजमगढ़। जिले में गेहूं की मड़ाई का कार्य लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन इसका प्रभाव अब भी लोगों के स्वास्थ्य पर देखा जा रहा है। मड़ाई के दौरान हवा में फैले धूल, पराग कण और फफूंद के कण श्वांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर चुके हैं, जो अब श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याएं पैदा कर रहे हैं।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरके कुशवाहा ने बताया कि किसानों के यहां कटाई मड़ाई का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन इस दौरान सांस के माध्यम से शरीर के अंदर जमा हुई धूल अब समस्या पैदा कर रही है। ओपीडी में रोजाना 135-140 मरीज आ रहे हैं। इसमें से दमा के 40-45 और एलर्जी के 50-55 मरीज मिल जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मरीजों में खांसी, गले में खराश, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसे लक्षण प्रमुख रूप से देखे जा रहे हैं। दमा और एलर्जिक ब्रोंकाइटिस के मरीजों की स्थिति अधिक गंभीर हो रही है। ओपीडी में भीड़ बढ़ रही है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर लोगों पर इसका प्रभाव ज्यादा देखा जा रहा है। इसका समय पर इलाज होना बहुत जरूरी है।
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ऐसे करें बचाव-
धूल से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करें।
खलिहान जैसे धूल वाले स्थानों पर जाने से बचें।
घरों के आसपास सफाई बनाए रखें ।
अधिक धूल होने पर दरवाजे खिड़कियां बंद रखें।
दमा और एलर्जी के मरीज अपनी दवाएं नियमित रूप से लेते रहें।
लक्षण बढ़ने पर देरी न करते हुए तुरंत जांच कराएं।
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