फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जयंती पर याद किए गए प्रिय प्रवास के रचयिता

विज्ञापन
विज्ञापन
निजामाबाद। प्रिय प्रवास के रचयिता कवि सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध का जन्मदिवस गुरुवार को उनकी प्रतिमा के पास सादगी के साथ मनाया गया। इस दौरान लोगों ने उनकी आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन

वक्ताओं ने कहा कि कवि सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध का जन्म निजामाबाद कस्बे में एक गौड़ परिवार में 15 अप्रैल 1865 को हुआ था। इनके पिता का नाम भोला सिंह और माता का नाम रुक्मणी था। अस्वस्थता के कारण हरिऔध जी का विद्यालय में पठन-पाठन ना हो सका। उन्होंने घर पर ही उर्दू, संस्कृत ,फारसी, बंगला और अंग्रेजी का अध्ययन किया 1833 ईस्वी में निजामाबाद में मिडिल स्कूल में हेड मास्टर हो गए। 1890 ईस्वी में कानूनगो की परीक्षा पास करने के बाद कानूनगो बन गए। सन् 1923 में पद से अवकाश लेने पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राध्यापक बने। कहा जाता है कि हिंदी कवि के विकास में हरिऔध जी की भूमिका मील का पत्थर साबित हुई। उन्होंने संस्कृत छंदों का हिंदी में सफल प्रयोग किया है। प्रियप्रवास की रचना संस्कृत वर्ण वृत्त में करके जहां कभी सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जी ने खड़ी बोली को पहला महाकाव्य दिया। वहीं आम हिंदुस्तानी बोलचाल में चोखे चौपादे, चुपदे चौपदे, रच कर उर्दू जुबान की मुहावरे दारी की शक्ति से कवि सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध को कवि रूप में सर्वाधिक प्रसिद्धि मिली। इस मौके पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेमा यादव, अधिशासी अधिकारी प्रहलाद पांडेय, डा. सुदर्शन मिश्रा, हरेंद्र यादव, रामवृक्ष रावत, नरेंद्र प्रजापति, राजू यादव, संजय यादव, ,संतोष गोंड, गगन कश्यप, अशोक यादव, साधु विश्वकर्मा आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें