आजमगढ़। कोरोना ने कई बच्चों को बेसहारा कर दिया है। सरकार ‘उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ के तहत इन बच्चों की परवरिश का खर्च उठाएगी। बाल कल्याण विभाग ने अब तक 36 अनाथ बच्चों का आवेदन शासन को भेजा गया है, जिनको सहायता देने की मजूरी हो गई है। मगर असल दिक्कत आवेदन के साथ लगने वाले दस्तावेजों को बनवाने की है, जिसे आसानी से बच्चे नहीं बनवा पा रहे हैं।
महामारी से बेसहारा और अनाथ हुए बच्चों की तलाश कर उन्हें मदद पहुंचाने की पहल शुरू कर दी गई है। साथ ही केंद्र और प्रदेश सरकार की घोषणा के अनुसार मदद देने के लिए आवेदन फार्म भी भरवाने शुरू कर दिए गए हैं। सबसे अधिक दिक्कत आवेदन के साथ लगने वाले प्रमाणपत्र को लेकर है। क्योंकि बच्चे अभी रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं, जबकि ऐसे बेसहारा बच्चे जो अपने मां या पिता को खो चुके हैं, उनके घर की स्थिति भी ठीक नहीं है। ऐसे में जरूरी नियमों को पूरा करना और प्रमाण पत्रों को बनवाकर आवेदन फार्म के साथ जमा करना बच्चों के साथ बड़ों के लिए भी परेशानी का सबब बना है।
कोरोना से कई बच्चों के माता व पिता की मृत्यु हो गई है। जांच पड़ताल कर 36 बच्चों का आवेदन शासन को भेज दिया गया है। शासन से आवेदन स्वीकृत भी हो गए हैं। उक्त बच्चों को हर महीने चार हजार रुपये दिए जाएंगे। बस मुख्यमंत्री के हरी झंडी का इंतजार किया जा रहा है।
बीएल यादव, जिला प्रोबेशन अधिकारी