श्रीराम राष्ट्रीय इंटर कॉलेज जहानागंज से कुछ दूरी पर स्थित पुलिया के पास मरीजों को दी जाने वाली दवा कूूड़े की तरह फेकी मिली। इतना ही नहीं करीब चार बोरी दवाओं में आग भी लगा दी गई। जबकि दवाएं अभी एक्सपायर भी नहीं हुई थीं। शिकायत पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम अपनी खामियों को छिपाने में जुट गई। करीब तीन बोरी में दवाएं भरकर स्वास्थ्य विभाग की टीम अपने साथ ले गई। यह दवाएं यहां कैसे पहुंचीं इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग भी बताने से कन्नी काटता रहा। जहानागंज ब्लाक के सीएचसी कोल्हूखोर क्षेत्र में एक पुलिया के पास ढ़ेर सारी दवाएं फेंकी गई थी। जिसमें आरबीएसके टीम व आंगनबाड़ी को दी जाने वाली दवाएं जैसे आयरन ब्लू, आयरन पिंक, अलमेंडा जोल दवाएं थी। इसके साथ ही जाइको केन, सिल्वर सल्फर डाई, आई ड्रॉप व बॉडी लोशन भी मिले। उक्त सभी दवाएं अभी एक्सपायर भी नहीं हुई थी। करीब चार बोरी दवाओं का ढ़ेर लगा था। इसे नष्ट करने के लिए किसी ने आग भी लगा दी थी। उधर से गुजर रहे एक नागरिक ने इसकी शिकायत सीएचसी कोल्हूखोर के प्रभारी डा. धनंजय पांडेय को दी। उन्होंने दो टुक में कहा कि फेंकी गई दवाएं सरकारी नहीं हैं। इसके बाद नागरिक ने मुख्य चिकित्साधिकारी से शिकायत की। उनके निर्देश पर एसीएमओ डा. संजय अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वहां फेंकी गई दवाओं को वह बोरे में रखवाकर अपने साथ लेकर चले गए।
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अगर पहुंचती दवा, तो होता आमजन का भला
आजमगढ़। ग्रामीणों को वितरित की जाने वाली दवा अगर उन तक पहुंचती तो काफी लाभ होता। आमजन को दवा के लिए यहां से वहां भटकना नहीं पड़ता। जिम्मेदारों की अनदेखी की वजह से आमजन के लिए भेजी गई दवाओं को कूड़े में डाल दिया गया। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की जरूरत है।
मामला संज्ञान में आया है। जांच कराई जाएगी कि यह दवाएं कहां से पहुंची। दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -डा. आईएन तिवारी, सीएमओ आजमगढ़।
जहानागंज में एक पुलिया के पास काफी दवाएं मिली। इसमें कुछ दवाएं ऐसी हैं जो आरबीएसके और आंगनबाड़ी टीम को बांटने के लिए दी जाती है। वहीं कुछ दवाएं ऐसी है जो सरकारी अस्पतालों में नहीं मिलती। हालांकि दवाओं के बैच नंबर मिलान करने के लिए सीएचसी कोल्हूखोर के प्रभारी डा. धनंजय पांडेय को दिया गया है। जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - डा. संजय, एसीएमओ आजमगढ़।