आजमगढ़। सरकार नाविकों पर मेहरबान हुई है। सरकार ने नाव दुर्घटनाओं को रोकने और होने के बाद बचाव के लिए प्रतिवर्ष मानसून से पहले नाविकों और गोताखोरों को प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। यही नहीं नाविकों को नाव के लिए ऋण भी दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने एसओपी तैयार की है।
नाव दुर्घटना होने पर राहत व बचाव कार्यों का बेहतर प्रदर्शन करने वाले नाविकों और गोताखोरों को सरकार पुरस्कृत करेगी। बचाव के दौरान किसी नाविक, गोताखोर या व्यक्ति को कुछ हो जाता है तो उसके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए तैयार नीति पर अमल के लिए जिला स्तर पर डीएम, तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान व लेखपाल की संयुक्त समिति बनाने का प्रावधान है। ये समितियां मल्लाहों को प्रशिक्षण, प्रोत्साहन, व रोजगार दिलाने के संबंध में कार्रवाई करेंगी। राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण इनका मार्गदर्शन करेगा। हर मानसून से पहले 10 जून तक नाविकों और गोताखोरों का सात से 10 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान नाविकों व गोताखोरों को अर्र्ध कुशल श्रमिक को दिया जाने वाला मानदेय मिलेगा। साथ ही प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, नि:शुल्क सेफ्टी किट देगी। सरकार की योजनाओं का लाभ नाविकों व गोताखोरों को प्राथमिकता के आधार पर दिलाया जाएगा। ऐसे गांव जहां नौकाएं संचालित होती हैं वहां की ग्राम पंचायतें हर छह महीने पर नाव सुरक्षा जागरूकता अभियान का आयोजन करेंगी।
सगड़ी तहसील में हैं कुल 986 नाविक
लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवारा क्षेत्र में प्रतिवर्ष लोगों को बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है। लोगों को अपने घर तक पहुंचने के लिए नाव ही एक मात्र साधन होता है। सगड़ी तहसील क्षेत्र में कुल 986 नाविक हैं। बाढ़ से 11308.68 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित होता है। क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या 213 है। जिसमें पूर्ण रूप से 195 गांव इस बार प्रभावित हुए। इस वर्ष महुला गढ़वाल बांध से घाघरा के बीच 62 गांव में लगातार 48 दिन तक नाव का संचालन किया गया। जबकि क्षेत्र में कुल 128 छोटी नाव, 215 मझोली और 17 बड़ी नाव का संचालन किया गया। छोटी नाव पर दो नाविक, मझोली नाव पर तीन नाविक और बड़ी नाव पर पांच नाविक होते हैं।
दो वर्षों से हो रही माकड्रिल
लाटघाट। सगड़ी तहसील क्षेत्र के देवारा में प्रतिवर्ष लोग बाढ़ की समस्या का सामना करते हैं लेकिन क्षेत्र के लोगों को पहले माकड्रिल आदि के जरिए बाढ़ के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के संबंध में जानकारी नहीं दी जाती थी। दो वर्षों से एनडीआरएफ और प्रशासन द्वारा क्षेत्र के लोगों को माकड्रिल के जरिए बाढ़ के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और दुर्घटना होने पर बचाव के संबंध में जानकारी दी जाती है।
बाढ़ आने पर मिलता है काम, फिर करते हैं मछली पालन
आजमगढ़। सगड़ी तहसील का देवारा क्षेत्र वर्ष में लगभग डेढ़ महीने तक बाढ़ की समस्या से जूझता रहता है। इस दौरान प्रशासन की ओर से नाविकों को लगाया जाता है ताकि बाढ़ क्षेत्र के लोगों को बाहर निकाला जा सके और जो लोग ऊंचाई पर रहते हैं उन्हें जरूरी सामानों की कमी नहीं होने पाए। इस प्रकार लगभग डेढ़ महीने तक नाविकों को रोजगार मिलते हैं उसके बाद पूरे साल नाविक मछली मारकर अपना गुजर बसर करते हैं।
नाव हादसों में कमी लाने के लिए सरकार ने यह योजना बनाई है। लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए। इस बार जितनी नाव लगाई गई थी और जितने नाविक लगे थे। उसमें से ज्यादातर का भुगतान हो गया है। कुछ लोगों का बजट के अभाव में भुगतान रह गया है। बजट मिलते ही सबका भुगतान कर दिया जाएगा। - गुरु प्रसाद गुप्ता, एडीएम वित्त एवं राजस्व।