सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों की ओर से निजी तौर पर फीस लेकर मरीजों का इलाज करने का क्रम लंबे समय से जारी है। प्रदेश में भाजपा सरकार की लगाम कसने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी गंभीर हो गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. श्रीकांत तिवारी ने सोमवार को सरकारी डाक्टरों को निजी प्रैक्टिस न करने की चेतावनी दी। साथ ही सरकारी डाक्टरों की सेवा लेने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा है कि सरकारी चिकित्सक अपने सरकारी दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और निशुल्क सेवा के साथ करें। लेकिन ऐसा देखा जा रहा है किवे कहीं न कहीं अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही हो रही है। साथ ही निजी चिकित्सालय के प्रबंधक उन्हें अपने प्रतिष्ठान पर बैठाकर गरीब जनता का दोहन कर रहे हैं।
इन सारी स्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सरकार ने चिकित्सकों के साथ-साथ निजी चिकित्सालय प्रबंधकों पर भी कड़ी कार्रवाई के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं। जिसके तहत यदि कहीं भी ऐसी घटना संज्ञान में आती है तो तत्काल संबंधित चिकित्सालय का पंजीकरण निरस्त करके उसे सीज कर दिया जाएगा और नियमानुसार चिकित्सक और अस्पताल मालिक के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शासन के आदेश के अनुपालन में उक्त चेकिंग अभियान के लिए जिले में वरिष्ठ अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के नेतृत्व में चार विशेषज्ञों की एक टीम गठित की जा चुकी है जो अपने नियमित भ्रमण के दौरान अनिय़मितता मिलने या दोषी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई कर हमें तत्काल सूचित करेगी। इसकी रिपोर्ट वह शासन को भेजेंगे।