क्षेत्र के रजादेपुर स्थित श्री सन्यासी मठ में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता परायण एवं पार्थिवार्चन सपादलक्ष में सातवें दिन बृहस्पतिवार को विधि-विधान एवं मंत्रोच्चारण के बीच वेदी पूजन एवं पार्थिव शिवलिंग का पूजन हुआ। इस दौरान लगे हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा मठ गूंज उठा।
कथावाचक ने प्रहलाद के चरित्र का वर्णन किया। काशी से पधारे कथावाचक पं. हृदयग्रीवाचार्य ने कहा भक्त और भगवान का संबंध बड़ा विलक्षण होता है। ज्ञानी भगवान को पकड़ता है और भगवान भक्त को पकड़ते हैं। जिसके जीवन का अभिमान समाप्त हो जाता है, वही भक्त हो जाता है और भगवान उसके लिए और उसके वचनों को पूरा करने के लिए कभी राम बनते हैं, कभी परशुराम बनते हैं, कभी कृष्ण बनते हैं। कथा सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गए। इस दौरान हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा मठ गूंज उठा। भक्तों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की।