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ईश्वर तक जाता है सत्संग का मार्ग

Thu, 02 Jul 2015 12:11 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आजमगढ़
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नगर के भवनरनाथ मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा और ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन प्रेममूर्ति संत सर्वेश जी महाराज ने  कहा कि सत्संग का रास्ता ईश्वर तक जाता है। उन्होंने राज जन्म का वर्णन भी किया। कहा कि जहां प्रभु की कथा या सत्संग होता है वहां अवश्य जाना चाहिए। क्योंकि यहीं से होकर रास्ता ईश्वर तक जाता है। मनुष्य को क्रोध से बचना चाहिए। क्रोध आने पर भूल होती है और मनुष्य पाप का भागी होता है।
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क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। रामजन्म के वृतांत का वर्णन करते हुए संत सर्वेश जी महाराज ने कहा कि पुत्र रत्न की प्राप्ति की अभिलाषा में प्रभु श्रीराम गुरु वशिष्ठ के पास जाते हैं। वह उन्हें इसके लिए यज्ञ करने की सलाह देते हैं। बोले जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, आसुरी प्रवृत्तियां बढ़ेंगी, मंदिर तोड़े जाएंगे, निर्दोषों केे सताया जाएगा, गो-हत्या होगी और साधु-संतों का अपमान होगा तब-तब प्रभु का अवतार निश्चित है। यहीं पर कथा समाप्त होती है।

कथा के चौथे दिन के यजमान व्यवस्थापक विपिन सिंह रहे। इस मौके पर बलवंत सिंह, अनिल सिंह, सुनीता सिंह, रामप्रीत मिश्रा, डा. दिनेश शर्मा, इंदल उपाध्याय, सूर्यभान सिंह, दीपू, राजन, राजेश रंजन, नौरंग सिंह, मेटा सिंह आदि उपस्थित हुए।
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