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निवर्तमान प्रधानों को देना पांच साल का हिसाब

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आजमगढ़। पंचायत चुनाव की लड़ने की तैयारी में जुटे निवर्तमान प्रधानों को फिर से मैदान में उतरने के लिए पिछले पांच साल का हिसाब देना होगा। जिस ग्राम पंचायत की कार्यपूर्ति प्रमाण नहीं मिलेगी उस गांव के निवर्तमान प्रधान दोबारा से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पाई-पाई का हिसाब देने वाले प्रधानों को ही दोबारा चुनाव लड़ने की इजाजत दी जाएगी।
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जिले की 1858 ग्राम पंचायतों में चुनाव की तैयारी चल रही है। हर गांव में कई-कई लोग चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन, इस बीच शिकायतों का दौर भी बढ़ा है। विरोधी प्रधानों की शिकायतें करने के लिए लोकायुक्त तक पहुंच रहे हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी ने सभी विकास खंडों के एडीओ पंचायत के माध्यम से प्रधानों से हिसाब मांगना शुरू कर दिया है।
चुनाव से पहले सभी प्रधानों और सचिवों कार्यपूर्ति प्रमाण देने होंगे। पिछले पांच साल का हिसाब देना होगा। प्रधानों को यह बताना होगा कि उनकी ग्राम पंचायत को कुल कितनी धनराशि मिली। कितनी धनराशि किस मद में खर्च की गई है। शौचालयों के निर्माण को लेकर तो शिकायत नहीं है। कार्यपूर्ति प्रमाण न देने वाले ग्राम प्रधानों को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं मिल पाएगी। जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दुबे ने बताया कि जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी भी चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को भी अनापत्ति प्रमाण पत्र देना होगा। जिला पंचायत का बकाया होने पर पर्चा खारिज हो सकता है। क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए भी किसी अनापत्ति प्रमाण पत्र देना होगा।
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