स्व. गिरीश चंद्र श्रीवास्तव, पूर्व पालिकाध्यक्ष
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आजमगढ़। अपने कार्यों के बदौलत शहरवासियों के दिलों में खास जगह बनाने वाले पूर्व पालिकाध्यक्ष गिरीशचंद्र श्रीवास्तव की 10वीं पुण्यतिथि शुक्रवार को मनाई जाएगी। नगरपालिका आजमगढ़ में किए गए कार्यों और शहरवासियों के साथ मृदु व्यवहार को लेकर लोगों के मन उनके लिए विशेष स्थान है।
पुण्यतिथि पर शुक्रवार को सुबह नगर पालिका परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उनके चित्र पर माल्यार्पण किया जाएगा तथा श्रद्धांजलि दी जाएगी। शाम पांच बजे शहर के कुर्मी टोला स्थित उनके आवास पर सभा का आयोजन किया गया है। 25 अगस्त 1954 में पैदा हुए गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव का अभावों के साथ चोली दामन का साथ रहा। वह गरीबों का दर्द समझते थे, क्योंकि यह दंश उन्होंने खुद भी झेला था। कोई गरीब व्यक्ति अगर अपनी लड़की की शादी का निमंत्रण उन्हें भेज दिया तो शादी के दिन उसके दरवाजे पर पालिका का टैंकर पानी लिए पालिका का कर्मचारी पहुंच जाता था। सफाईकर्मी झाडू लगाकर चूना छिडकाव कर देते थे। वह खुद शाम को बारात आने से पहले बारात की अगवानी के लिये पहुंच जाते थे। शिक्षा-दीक्षा बहुत ज्यादा न होने के बावजूद समाज के लिये कुछ करने का जज्बा उनके अन्दर कूट-कूट कर भरा हुआ था। कद्दावर राजनेता चन्द्रजीत यादव की पारखी नजर उन्हें पहचान गई। उन्होंने गिरीश श्रीवास्तव को अपना राजनैतिक शिष्य बनाया। राजनैतिक जीवन शुरू करने के बाद वर्ष 1984 उनकी शादी हुई। वर्ष 1989 में वह पहली बार सभासद चुने गए। वर्ष 1995-96 में वह फिर सभासद चुने गए। वर्ष 2000 की नगर निकाय चुनाव में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष माला द्विवेदी को हराकर पालिकाध्यक्ष पद पर रिकार्ड मतों से जीत हासिल की। वर्ष 2006 में पालिकाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस ने उनको उम्मीदवारी नहीं दी। निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और ऐतिहासिक जीत हासिल की। इसके बाद बसपा में शामिल हो गए। 12 जून 2010 को उनका निधन हो गया। उनकी पत्नी शीला श्रीवास्तव को वर्तमान आजमगढ़ पालिका की अध्यक्ष हैं।