घाघरा नदी का जलस्तर पिछले पांच दिनों से लगातार बढ़ रहा है, जिससे कई गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा मंडरा रहा है। जलस्तर में वृद्धि के कारण कृषि योग्य भूमि तेजी से कट रही है, और ग्रामीणों को आवागमन और पशुओं के लिए चारे की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
बदरहुआं नाले पर सोमवार शाम चार बजे जलस्तर 70.76 मीटर था, जो मंगलवार को 11 सेमी बढ़कर 70.87 मीटर हो गया। न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर, खतरे का निशान 71.68 मीटर, और अधिकतम 73.52 मीटर है। डिघिया नाले पर जलस्तर 70.04 मीटर से 12 सेमी बढ़कर 70.16 मीटर हो गया, जो खतरे के निशान (70.40 मीटर) से मात्र 24 सेमी नीचे है। न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर और अधिकतम 72.59 मीटर है।
घाघरा में 3,26,901 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। इसमें शारदा बैराज से 1,53,584 क्यूसेक, गिरिजा बैराज से 1,55,103 क्यूसेक, और सरयू बैराज से 18,214 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से सहबदिया और देवारा खास राजा गांव में कटान तेज हो गई है। सहबदिया गांव के पूरब परियोजना के आगे खेती योग्य जमीन नदी में समा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान पीड़ितों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
महुला गढ़वल बांध से जुड़े तीन गांवों बांका, मानिकपुर और शाहडीह के संपर्क मार्ग पर घाघरा नदी का पानी चढ़ना शुरू हो गया है। यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो इन गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ पीड़ितों के लिए तत्काल राहत सामग्री, नाव, और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की जाए।
साथ ही, कटान रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि और अधिक कृषि भूमि नष्ट होने से बच सके। वहीं, जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए 10 बाढ़ चौकियां और 14 आश्रय स्थल स्थापित किए हैं, लेकिन अभी तक बाढ़ चौकियां सक्रिय नहीं हुई हैं। ग्रामीणों को नाव और पशुओं के लिए चारे की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सहायक अभियंता शिवकुमार ने बताया कि महुला गढ़वल बांध पूरी तरह सुरक्षित है और बांध की देखरेख के लिए अवर अभियंता व सहायक अभियंता तैनात हैं।