लाटघाट। घाघरा का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। नदी बढ़ने का साथ ही कटान भी तेज हो गया है। इससे घाघरा के किनारे स्थित गांवों के लोगों में दहशत है। वहीं, प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था न किए जाने से ग्रामीणों में रोष पनप रहा है। गुरुवार शाम बदरहुआ में नदी का जलस्तर 71.55 सेमी और डिघिया पर 70.66 सेमी दर्ज किया गया। वहीं, देवारा खास राजा के मुराली का पुरवा में कटान के भय से लोग अपने परिवार के सदस्यों को रिश्तेदारों के यहां भेज दिए हैं। घर के सामान और पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी में हैं।
जिले में भारी बारिश के बाद नदियां उफान पर है। नदी में आगे से भी पानी छोड़ा जा रहा है। इससे घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार को सुबह आठ बजे तक बदरहुआ में 71.47 और डिघिया में 70.57 जलस्तर दर्ज किया गया। डिघिया पर खतरे का निशान 70.40 और बदरहुवा पर 71.68 सेमी है। वहीं शाम के समय बदरहुआ में नदी का जलस्तर 71.55 सेमी और डिघिया पर 70.66 सेमी दर्ज किया गया। डिघिया में घाघरा खतरे के निशान से 26 सेमी ऊपर बह रही है। वहीं से बदरहुआं में लाल निशान से मात्र 13 सेमी नीचे है।
उधर, घाघरा का जलस्तर बढ़ने से कटान तेज हो गया है। सगड़ी तहसील क्षेत्र के घाघरा के किनारे बसे गांव देवारा खास राजा के मुराली का पुरवा में कटान जारी है। कटान से राधेश्याम, लालधर, परसन, जगदीश, तीर्थराज, रामवृक्ष, लाल बचन, पूजन, शिवनाथ आदि का घर कटान के मुहाने पर खड़ा है। प्रशासन की ओर से बचाव के लिए कोई व्यवस्था न किए जाने से ग्रामीणों में गुस्सा है। कटान के डर से मुराली के पुरवा के लोग दिन हो या रात जाग कर गुजार रहे हैं।
उन्हें भय है कि कब घाघरा का कटान तेज हो जाएगा और आशियाने नदी में विलीन हो जाएंगे। उक्त लोगों ने घर की महिलाओं और बच्चों को रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है। कुछ ने अन्य स्थान पर मड़ई डाल परिवार के लोगों को रखा है। अब पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी में हैं।
लोगों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि लापरवाही से अब तक कई लोग अपना आशियाना गवां चुके हैं। देवारा खास राजा गांव के रमई का पुरवा के सात लोगों का आशियाना घाघरा नदी में विलीन हो चुका है। वर्ष 2016 में मुराली के पुरवा के ही पांच लोगों का आशियाना घाघरा नदी में विलीन हो गया था। अब बचे 14 परिवार का घर भी नदी में समा जाएंगे। प्रशासन ने अब तक इन्हें बचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की है।
वहीं बाढ़ खंड विभाग का कहना है कि यह फ्लड एरिया में पड़ता है, यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। तहसीलदार सगड़ी हीरालाल ने कहा कि कटान से पीड़ितों को बसाने के लिए जमीन आरक्षित कर ली गई है। रिपोर्ट आने पर मुआवजा भी दिया जाएगा। प्रधान प्रधान इंद्रावती देवी ने विस्थापित हुए पांच परिवारों को प्रशासन से जल्द ही जमीन मुहैया कराने और मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जहां जमीन कट रही है, वहां से उक्त 14 परिवार को हटाकर हमारे गांव देवारा खास राजा में जहां भी जमीन बचती है, वहां इन्हें बसाया जाएगा।