रानी की सराय। नजला, खांसी और बुखार जैसी सामान्य दिखने वाली बीमारियां गंभीर रूप लेती जा रही हैं। बिना चिकित्सकीय परामर्श दवाओं का सेवन करने से कई मरीजों की हालत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। कुछ मरीजों को सांस फूलने की शिकायत हो रही है। जांच में ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के लक्षण पाए जा रहे हैं। रानी की सराया पीएचसी के चिकित्साधिकारी डॉ. मनीष तिवारी ने बताया कि हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के सूक्ष्म कण सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंच जा रहे हैं। एलर्जी या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं। हर दिन करीब 150 मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि बुखार, खांसी या सांस लेने में किसी भी प्रकार की परेशानी को नजरअंदाज ना करें और तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
ये हैं लक्ष्ण
इसकी शुरूआत जुकाम से होती है, समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह फेफड़ों में संक्रमण और बलगम बनाने लगता है।
श्वसन नलिका में सूजन आने से खांसी बढ़ जाती है, यदि इसके साथ बुखार हो तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचने पर मरीज को बेचैनी, भ्रम, चिड़चिड़ापन और रक्तचाप की समस्याएं भी हो सकती हैं।