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आजमगढ़ मामले की पूरी कहानी: मौत से पहले प्रिंसिपल के कमरे के बाहर दिखी थी छात्रा,उसके साथ उस दिन क्या-क्या हुआ

Tue, 08 Aug 2023 08:42 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़

सार

छात्रा की मौत के बाद कई घंटों तक परिजनों को सूचना नहीं दी गई। इतना ही नहीं परिजनों को सूचना दिए बगैर ही उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भी ले जाया गया। परिजनों ने विद्यालय प्रशासन पर सोमवार को ही कई गंभीर आरोप लगाए थे।
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स्कूल में छात्रा की मौत (सांकेतिक) - फोटो : Social Media
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विस्तार
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आजमगढ़ के चिल्ड्रन गर्ल्स कॉलेज में छात्रा की मौत का मामला बढ़ता ही जा रहा है। प्रधानाचार्या व शिक्षक की गिरफ्तारी को लेकर सीबीएसई स्कूल मैनेजर्स एसोसिएशन लामबंद हो गया है। 

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चिल्ड्रन गर्ल्स कॉलेज की छात्रा श्रेया तिवारी की आत्महत्या का प्रकरण खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस द्वारा इस मामले में प्रधानाचार्य और कक्षाध्यापक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इसके बाद भी इस घटना का रोष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को एक बार फिर इस घटना को लेकर उबाल देखने को मिला। एक तरफ जहां पूरे प्रदेश में निजी विद्यालय बंद रहे, वहीं दूसरी ओर अभिभावक संघ के साथ अन्य संगठनों ने मिलकर शहर में जुलूस निकाला और अभिभावकों से अपने बच्चों को बुधवार को विद्यालय न भेजने की अपील की गई। 
यह भी पढ़ें- Azamgarh: स्कूल बंदी के खिलाफ अभिभावक महासंघ ने निकाला जुलूस, क्यों कर रहे बच्चों को स्कूल न भेजने की अपील?
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बता दें कि 31 जुलाई को चिल्ड्रन गर्ल्स कॉलेज की कक्षा 11 की छात्रा श्रेया तिवारी की बैग में मोबाइल मिलने के मामले में प्रधानाचार्य के समक्ष पेशी होती है। प्रधानाचार्य द्वारा छात्रा को डांटा फटकारा जाता है और अपने कक्ष के बाहर खड़ा करते हुए परिजनों को बुलाने की बात कही जाती है। इसके बाद विद्यालय की ओर से श्रेया के परिजनों को फोन किया जाता है और उनके आने का इंतजार होने लगता है। काफी देर तक खड़ी रहने के बाद श्रेया अचानक ऊपर जाने के लिए सीढि़यों की ओर चल देती है। तीसरी मंजिल पर पहुंचकर वहां से कूदने का प्रयास करने लगती है, बच्चे शोर मचाते हैं। जब तक उसे बचाया जाता तब तक वह ऊपर से कूद जाती है। इसके बाद विद्यालय के कर्मचारी उसे आनन फानन में लेकर रमा अस्पताल में पहुंचते हैं जहां चिकित्सकों द्वारा उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद जब विद्यालय में श्रेया के परिजन पहुंचते हैं तो उन्हें एंबुलेंस में एक शव रखा हुआ मिलता है। वहां मौजूद कर्मचारी से पूछने पर उसे प्रधानाचार्य के पास भेज दिया जाता है। जहां उन्हें श्रेया के साथ हुए हादसे की जानकारी दी जाती है। इसके बाद परिजनों द्वारा पुलिस को फोन से सूचना दी जाती है। मौके पर पुलिस पहुंचती है और फोरेंसिक टीम को बुलाकर छानबीन करती है। इस दौरान परिजनों द्वारा विद्यालय प्रबंधन पर अनेक आरोप लगाए जाते हैं। पुलिस द्वारा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है। पोस्टमार्टम में चोट के कारण ही मौत की बात सामने आई। 

सामाजिक संगठनों ने खोला मोर्चा
आजमगढ़। इस घटना के दूसरे दिन से ही कुछ सामाजिक संगठनों ने विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनके द्वारा डीएम को ज्ञापन सौंपने के साथ ही कैंडिल मार्च निकालकर प्रधानाचार्य और कक्षाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाने लगी। इस पर पुलिस द्वारा प्रधानाध्यापक और कक्षाध्यापक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। 

 


 

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up 112 - फोटो : amar ujala

पुलिस ने किया गिरफ्तार
आजमगढ़। सामाजिक संगठनों के दबाव और लोगों के बढ़ते रोष को देखते हुए प्रशासन ने विवेचना के बाद प्रधानाध्यापक सोनम मिश्रा और कक्षाध्यापक अभिषेक राय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि विवेचना में हत्या की पुष्टि न होने पर इस मामले को हत्या के लिए उकसाने का दर्ज किया गया। 

क्या बोले प्रिंसिपल व टीचर?
पूछताछ में प्रिंसिपल व टीचर ने बताया कि श्रेया के बैग से मोबाइल बरामद हुआ था। जिसके लिए उसे डांटा फटकारा गया था और परिजनों को फोन किया गया था। सजा के तौर पर प्रधानाचार्य के ऑफिस के बाहर खड़ा किया गया था और परिजनों के आने का इंतजार हो रहा था। जिसके कारण खुद अपमानित महसूस करते हुए उसने इस तरह की घटना को अंजाम दिया। 

प्रधानाध्यापक और कक्षाध्यापक की गिरफ्तारी पर निजी विद्यालयों ने बंद किया विद्यालय
आजमगढ़। श्रेया आत्महत्या प्रकरण में प्रधानाचार्य और कक्षाध्यापक को गिरफ्तार करने के विरोध में मंगलवार को पूरे प्रदेश में सभी बोर्डों के निजी विद्यालय बंद रहे। चिल्ड्रेन कालेज के प्रबंधक कृष्ण मोहन त्रिपाठी ने प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध जताते हुए न्यायोचित कार्रवाई की मांग की। साथ ही कहा कि कुछ लोगों द्वारा विद्यालय के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। 

संगठनों ने निकाला जुलूस
आजमगढ़। जहां एक तरफ निजी विद्यालय बंद रहे वहीं दूसरी ओर से इस मुद्दे को लेकर सामाजिक संगठन मैदान में उतर गए। उन्होंने निजी विद्यालयों की बंदी की कार्रवाई को तानाशाही बताया। उन्होंने लोगों इसके विरोध में नौ अगस्त को अपने बच्चों को विद्यालय न भेजने की अपील की।

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