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ठंड और गलन ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

Thu, 21 Jan 2016 11:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
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मकर संक्रांति के बाद जहां ठंड कम होती है, वहीं इस बार ठंड कम होने के बाद और बढ़ती जा रही है। रह-रहकर तेजी से चल रही पछुआ हवाएं शरीर में चुभन का एहसास करा रही है। गलन के कारण पशु, पक्षी, आम जनमानस सभी हलकान हैं।
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घने कोहरे के साथ शीतलहर चलने से गलन और ठिठुरन बढ़ गई। जिले में कोहरे का आलम यह रहा कि दिन में दोपहर तक सड़कों पर वाहन चालक हेडलाइट जलाकर चल रहे थे।

बर्फीली हवाएं सुई की तरह बदन में चुभ रही थी। स्कूल बंद होने के कारण बच्चे घरों में कैद रहे, परिजनों ने उन्हें घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। दोपहर बाद लगभग एक बजे भगवान भास्कर ने अपने नेत्र खोले तो हर कोई कुर्सी आदि लेकर धूप में भागता नजर आया।

धूप के कारण वातावरण में कुछ गर्मी जरूर आई लेकिन जैसे-जैसे दिन ढलता गया, गलन बढ़ती गई। इसके कारण रात के आठ बजते-बजते बहुत से दूकानदारों ने दूकान बंद करने में ही भलाई समझी। बाजारों में सन्नाटा पसर गया। वहीं मौसम के इस मिजाज से किसानों की बाछें खिल आई हैं।
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कुछ दिनों पूर्व तक मौसम को देखते हुए फसल के बर्बाद होने की कल्पना मात्र से जहां उनके पसीने छूट रहे थे। वहीं, अब उनमें अच्छी फसल होने की आस जग गई है। नगर के कई क्षेत्रों में सुबह गायब हुई बिजली के दर्शन देर शाम को ही        हो सके।
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