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जिले में शादी अनुदान के लिए भटक रहे चार हजार लोग

Sat, 11 Jun 2016 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ़
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d - फोटो : getty images
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गरीब बेटी के हाथ पीला करने के लिए सरकार की तरफ से चलाई जा रही शादी अनुदान योजना बीते दो वर्ष तक बंद रही। बावजूद इसके आवेदन पत्र भरवाए जाते रहे और इन दो वर्षों में चार हजार लोगों ने आवेदन किया था लेकिन अनुदान राशि के 20 हजार रुपये का भुगतान किसी को नहीं किया गया। इतना जरूर है कि लाभ दिलाने के नाम पर विभागीय कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से बिचौलियों ने अपने जेबें गरम कीं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अबतक 100 आवेदन जमा हुए हैं। बीते दो वर्षों में आवेदन करने वाले चार हजार लोग कार्यालयों का चक्कर काटने के साथ नेताओं के यहां दरबार लगा रहे हैं। 
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गरीबी के चलते बिटिया की शादी में अधिक दहेज न दे पाने वालों की मदद के लिए सरकार ने शादी अनुदान की योजना शुरू की है। इसके तहत 46 हजार बार्षिक आय वालों की बेटी की शादी में 20 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। योजना के लाभ के लिए आवेदक को शादी से तीन महीने पहले या तीन महीने बाद तक आवेदन करने का प्रावधान है। फार्म भरने वालों को शादी कार्ड के साथ-साथ जाति, आय, निवास, परिवार रजिस्टर की नकल लगाना अनिवार्य है।

खंड विकास अधिकारी स्तर से यह फार्म तहसील में भेजा जाता है। एसडीएम के माध्यम से समाजकल्याण विभाग को भेजा जाता है। जिले में शादी अनुदान योजना वर्ष 2013-14 और 2014-15 में बंद रही। इसके बाद भी इन वित्तीय वर्ष में योजना का लाभ दिलाने के लिए आवेदन पत्र लिए गए और चार हजार से अधिक लोगों आवेदन किया था लेकिन लाभ किसी को नहीं मिला। मजे की बात यह है कि योजना बंद होने के बाद भी आवेदन किस आधार पर लिया जाता रहा, जिम्मेदार अधिकारी इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे हैं। ऐसे लोग लाभ के लिए समाजकल्याण विभाग के अलावा अन्य उच्चाधिकारियों के कार्यालय और नेताओं के यहां दरबार लगा रहे हैं।
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लाभ पाने से पहले बेहाल हो जाते हैं लोग ः सरकारी अनुदान पाने के लिए आवेदकों को जाति, आय, निवास और परिवार रजिस्टर की नकल लगाना अनिवार्य है। सूत्रों की मानें तो सभी प्रमाणपत्र बनवाने में वकील की फीस से लेकर अन्य संबंधित लोगों तक के रेट बंधे हुए हैं। इसके बाद ही रिपोर्ट लगाई जाती है। ऐसे में लाभ पाने से पहले ही लाभार्थी बेहाल हो जाते हैं। 

20 हजार के चक्कर में गंवाए 7.5 हजार ः लालगंज ब्लॉक के रेतवां चंद्रभानपुर गांव निवासी रामअवध सरोज पल्लेदारी करते हैं। बताया कि बेटी बबीता की शादी अनुदान के लिए 27 जनवरी 2015 को आवेदन किया था। जबकि भतीजी कविता पुत्री स्व. अभिराम की शादी के लिए नौ मई 2015 को आवेदन जमा किया लेकिन अभी तक एक भी आवेदन की राशि नहीं मिली। उल्टे फार्म से लेकर अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर लगाने में करीब साढ़े सात हजार से अधिक रुपये खर्च हो गए। 

शादी अनुदान योजना 2013-14 और 2014-15 में बंद कर दी गई थी लेकिन इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने फिर चालू कर दिया है। इसके लिए बजट भी स्वीकृत हो गया है। मार्च से अब तक करीब सौ लोगों का आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इस वर्ष सभी वर्ग को इस योजना का लाभ देने का निर्देश है।
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- राजीव रतन सिंह, समाज कल्याण अधिकारी 
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