हमने जितनी किताबें पढ़ी जिसमें हमने अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी हासिल की। जितने भी महापुरुष हुए सबकी बातों पर गौर किया। अध्ययन के बाद हम इस मुकाम पर पहुंचे हैं कि हम उनके दिखाए रास्ते पर चलेंगे और लोगों को जागरूक करें।
आज हमें हिंदू के नाम पर बरगलाया जा रहा है जबकि हमें हिंदू नहीं माना जाता है। मैंने अनेक किताबें पढ़ी जिसमें समाज चार वर्णों में बांटा था। जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चार वर्ण थे। लेकिन आज लोग खुद को शूद्र कहने में शरमाते हैं।
लेकिन लोगों ने मुझे अपना अगुआ माना है तो हमने यह निर्णय लिया है कि मैं अपने नाम के आगे शूद्र जोड़ूंगा। यहां उपस्थित सभी लोग समाज हित में अपने नाम के आगे शूद्र जोड़ने का काम करेंगे। मैंने पहले ही अपने लोगों से कहा है कि वह उस मंदिर में न जाएं जहां ज्ञान नहीं मिलता है और हमारे लोग ठगे जाते हैं। तो हमारे लोग ज्ञान के मंदिर में जाएं जिससे हमारे समाज का विकास हो।
सोशल डिस्टेंसिंग भूले पूर्व सांसद
पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने गुलामी का प्रतीक बताते हुए लोगों के हाथों से रक्षा सूत्र काटा। लेकिन वह इस मौके पर कोरोना काल के नियमों का पालन करना भूल गए। पूर्व सांसद और उनके समर्थकों ने सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई।