इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता दीपक मिश्रा ने वादी समेत चार गवाहों को अदालत में पेश किया और तर्कों को रखा। अदालत ने उभय पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद हत्या के जुर्म में आरोपी आलोक यादव को दोषी पाया और उक्त सजा का निर्धारण किया।
अंगद यादव और राजनारायन सिंह बहुत करीबी थे। राजनारायन सिंह ने ही अंगद यादव की बेटी का विवाह मुंबई के संपन्न परिवार में कराया था। बाद में लड़की के व्यवहार से परिवार वाले खुश नहीं थे। जिसके बाद मामले में मुकदमा दर्ज हो गया। इस मुकदमें को वापस लेने के लिए अंगद यादव ने राजनारायन सिंह पर दबाव बनाया था और अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी।