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Azamgarh News: बाढ़ के पानी से सगड़ी के सात गांव घिरे, पुरैनिया बंधे से रिसाव

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महुला-गढ़वल बांध से मानिकपुर संपर्क मार्ग पर जमा पानी। संवाद
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घाघरा नदी में प्रति घंटा एक सेमी की गति से बढ़ रहे जलस्तर के चलते बुधवार को सगड़ी तहसील के सात गांव बाढ़ के पानी से घिर गए। गांवों को जाने वाले रास्तों पर बाढ़ का पानी चढ़ गया है।
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वहीं, महाराजगंज क्षेत्र के पुरैनियां गांव को कटान से बचाने के लिए 3.76 करोड़ की लागत से बने बंधे में रिसाव होने लगा है। इससे पुरैनियां गांव के 25 घरों पर बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। यहां नदी की लहरें घरों से मात्र सात-आठ मीटर की दूरी पर उफन रही हैं।
वहीं, शंकरपुर, तिवारीपुर गांव भी बाढ़ के पानी से घिर रहे हैं। गंगापुर गांव में नदी की धारा से मात्र 10 मीटर की दूरी पर 45 परिवार दहशत में जी रहे हैं। बाढ़ के पानी से अभी तक करीब एक हजार की आबादी प्रभावित हो गई है।
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बुधवार को भी लगातार जलस्तर में बढ़ाव का क्रम बना रहा। सिंचाई विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को भी बढ़ाव होने की आशंका जताई गई है। बृहस्पतिवार को अगर जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रही तो कई गांवों का संपर्क टूट जाएगा।
लाटघाट : सगड़ी तहसील क्षेत्र में लगातार घाघरा का जलस्तर बढ़ने से साहडीह, बांका और मानिकपुर गांवों का महुला-गढ़वाल बांध से जाने वाला संपर्क मार्ग पानी में डूब गया है। इससे आवागमन बाधित हो गया है और ग्रामीणों को पानी से होकर आना-जाना पड़ रहा है।
घाघरा का पानी बढ़ने के साथ ही की चक्की गांव के करीब 115 घर और लाला का पूरा के 35 घर पानी से घिर गए हैं। गांवों के चारों तरफ पानी पहुंचने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बाढ़ का पानी अब गांवों में भी घुसना शुरू हो गया है।
लगातार बढ़ते जलस्तर को देखकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बाढ़ प्रभावित परिवारों ने एहतियात के तौर पर महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थानों और रिश्तेदारों के यहां भेजना शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। संपर्क मार्ग डूबने से दैनिक जरूरतों के लिए भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
घाघरा नदी के बढ़ते जलस्तर पर अभियंता वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि अगले 24 घंटे तक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका है। हालांकि, अभी बांध को किसी प्रकार का खतरा नहीं है। उन्होंने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

बाढ़ के पानी से 30 बीघा परवल की खेती डूबी, संकट
लाटघाट। घाघरा नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ का पानी खेतों में पहुंचने लगा है। इससे किसानों की परवल की खेती प्रभावित होने लगी है। सहबदिया गांव में करीब 30 बीघा से अधिक क्षेत्रफल में लगी परवल की फसल पर बर्बादी का संकट मंडरा रहा है। खेतों में पानी घुसना शुरू होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सहबदिया निवासी गुल्लू, रामानंद, रामसमुझ, रामभवन, बिंदुलाल, विनोद, दिलीप, संतलाल, हरिलाल, श्रीराम, शिवदास और श्रीबल समेत अन्य किसानों की करीब 30 बीघा से अधिक परवल की फसल बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई है। किसानों का कहना है कि खेतों में पानी लगातार बढ़ा तो पूरी फसल नष्ट हो सकती है। परवल की खेती पर निर्भर किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के समय खेतों में पानी भरने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। बाढ़ का पानी जल्द नहीं निकला तो परवल की बेलें सड़ने लगेंगी और तैयार फसल भी खराब हो जाएगी। किसानों ने प्रशासन से बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने और फसल को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। संवाद

महुला-गढ़वल बांध सहित चिह्नित स्थानों पर बाढ़ चौकियां सक्रिय नहीं
लाटघाट। घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के बावजूद क्षेत्र में बाढ़ चौकियों के संचालन को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। महुला-गढ़वल बांध पर स्थापित बाढ़ चौकी सहित महुला, गागेपुर, हाजीपुर, जमुवारी, इस्माइलपुर, हैदराबाद, कुड़ही, सहदेवगंज और देवारा जदीद में बाढ़ चौकियां संचालित नहीं मिलीं। कई स्थानों पर बाढ़ चौकी का बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। बाढ़ का पानी लगातार बढ़ने के बीच बाढ़ चौकियों के सक्रिय नहीं होने से ग्रामीणों में चिंता है। लोगों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति में समय से सूचना और सहायता के लिए चौकियों का संचालन जरूरी है। वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात राजस्व कर्मियों की मौजूदगी भी सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है। संवाद

अनुपस्थित कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई
इस संबंध में उपजिलाधिकारी संजीव कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ चौकियों पर तैनात सभी राजस्व कर्मियों को तत्काल मौके पर भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, उन्हें अपने निर्धारित स्थान पर उपस्थित रहना होगा। ड्यूटी से अनुपस्थित मिलने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

बदरहुआ और डिघिया नाले का जलस्तर 23 सेंटीमीटर बढ़ा
लाटघाट। बदरहुआ और डिघिया नाले में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार शाम चार बजे बदरहुआ नाले का जलस्तर 71.57 मीटर दर्ज किया गया था, जो बुधवार को 23 सेंटीमीटर बढ़कर 71.80 मीटर हो गया। वहीं, डिघिया नाले का जलस्तर भी 70.94 मीटर से बढ़कर 71.17 मीटर पहुंच गया। बदरहुआ नाले का खतरा बिंदु 71.68 मीटर निर्धारित है। इस तरह यहां जलस्तर खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। बदरहुआ नाले का न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर और अधिकतम 73.52 मीटर है। डिघिया नाले का न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.59 मीटर निर्धारित है। बुधवार को डिघिया नाले का जलस्तर भी खतरे के निशान से 77 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। संवाद

पुरैनिया गांव पर मंडराया खतरा
महाराजगंज। विकास खंड के अराजी मलह पुरवा, गंगापुर और पुरैनिया गांव के करीब घाघरा का पानी आ जाने से गांव वालों की धड़कनें बढ़ गई हैं। छोटे व बड़े गड्ढे पानी से भर रहे हैं। चकरोड पर भी बाढ़ का पानी चढ़ने लगा है। घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी के किनारे बसे परिवार पर खतरा मंडराने लगा है। पुरैनियां गांव को बचाने के लिए बनाए गए बांध पर लगातार पानी का दबाव बढ़ रहा है। मिट्टी की बोरियां पानी में समा गई हैं। परकूपाइन नदी में डूब गए हैं। यहां बंधे में रिसाव हो रहा है। बंधे से टकराकर घाघरा की लहरों का पानी गांव की तरफ आ रहा है। पानी घरों के करीब पहुंच गया है। संवाद

पहले बाढ़ के पानी को देखकर डर लगता था, लेकिन धीरे-धीरे डर खत्म हो गया है। अब जब सुबह सोकर उठती हूं तो सबसे पहले गंगा मइया के ही दर्शन होते हैं। धीरे-धीरे पानी के बीच रहने की आदत हो गई है। अगर परिवार का कोई सदस्य घर पर रहता है तो रात में सो लेते हैं, लेकिन अकेले होने पर डर बना रहता है। -चानमती, निवासी पुरैनियां।

घर से महज आठ मीटर की दूरी पर नदी का पानी बह रहा है। नदी के पानी को रोकने के लिए जो बांध बनाए गए हैं, उनका कोई भरोसा नहीं है कि कब कट जाएं। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं, इसलिए हर समय उनकी रखवाली करनी पड़ती है। अचानक पानी घर में आ गया तो बच्चों को लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए भी कोई जगह नहीं है। -सावित्री, निवासी पुरैनियां।

बाढ़ रोकने के लिए बनाए गए बांध से पानी टकराने के कारण मिट्टी कट रही है। कटर नंबर दो के पास लगातार मिट्टी कटने से खतरा मंडरा रहा है। यदि समय रहते कटान को नहीं रोका गया तो बांध को नुकसान पहुंच सकता है और बाढ़ का पानी आसपास के इलाकों में पहुंचने का खतरा बढ़ जाएगा। -फूलबदन, पुरैनियां।
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