सेतु निगम ने भी बना लिया अस्थायी ऑफिस
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जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
ओवरब्रिज के नीचे अतिक्रमण और व्यावसायिक गतिविधियां खुलेआम संचालित होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। जब आम व्यक्ति सरकारी जमीन पर कब्जा करता है तो तत्काल कार्रवाई की बात कही जाती है, लेकिन ओवरब्रिज के नीचे वर्षों से चल रही दुकानों पर जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं पड़ रही, यह बड़ा सवाल है।
बेलइसा में गोदाम और ऑफिस, सिधारी में दुकानें
बेलइसा ओवरब्रिज के नीचे सरकारी संपत्ति पर सरकारी विभाग के लोगों ने ही गोदाम और ऑफिस तक बना दिए हैं। वहीं सिधारी ओवरब्रिज के नीचे 20 से अधिक दुकानें चल रही हैं। ऐसे में यह पड़ताल का विषय है कि इन कब्जों के लिए किस विभाग की अनुमति है और यदि अनुमति नहीं है तो अब तक इन्हें हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
ये हैं नियम
- ब्रिज के नीचे सड़क, सर्विस रोड, पैदल रास्ते या आपातकालीन मार्ग को दुकान, सामान, वाहन या निर्माण सामग्री रखकर बाधित नहीं किया जा सकता।
- सरकारी जमीन पर बिना सक्षम स्वीकृति माल, निर्माण सामग्री या अन्य सामान रखने के लिए स्थायी/अस्थायी गोदाम बनाना अतिक्रमण माना जा सकता है।
- पिलर और संरचना के आसपास ऐसा कब्जा नहीं होना चाहिए जिससे विभाग को निरीक्षण, रखरखाव या मरम्मत में परेशानी हो।
- पेट्रोल, गैस, ज्वलनशील सामग्री या आग का जोखिम पैदा करने वाली गतिविधियां ब्रिज के नीचे विशेष रूप से गंभीर सुरक्षा समस्या बन सकती हैं।
- सरकारी भूमि/सार्वजनिक संपत्ति पर अनधिकृत कब्जे के मामले में संबंधित सक्षम प्राधिकारी नोटिस देकर कब्जा हटाने की कार्रवाई कर सकता है।
अधिकारी बोले
ओवरब्रिज बनाने के बाद पीडब्ल्यूडी को ब्रिज हैंडओवर कर दिया जाता है। इसके बाद उसकी देखरेख और अतिक्रमण पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। बेलइसा ओवरब्रिज के नीचे ऑफिस बनाने की तो वह अस्थायी रूप से बनाया गया है। बगल में ओवरब्रिज का निर्माण हो रहा है। इसलिए वहीं पर जेई, इंजीनियर समेत अन्य कर्मचारी और मजदूर रहेंगे। हालांकि यह भी नियम के खिलाफ है, लेकिन करे भी तो क्या करें। -ज्ञानेंद्र वर्मा, अधिशासी अभियंता, सेतु निगम