बाढ़ के पानी से घिरे देवारा क्षेत्र के गांवों में बीमारियों ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। जिले के आलाधिकारी बाढ़ क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं लेकिन गांवों में समस्या कम नहीं हो रही है।
घाघरा हर बार की तरह इस बार भी तबाही मचाने को तैयार है। पानी से घिरे गांवों में बीमारियों ने अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। ग्रामीण हैंडपंप का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गांव के बच्चे और बूढ़े वायरल फीवर, खांसी, जुकाम और खुजली से पीड़ित हैं।
बाढ़ प्रभावित लोगों में किरासन तेल और राशन की समस्या बनी हुई। प्रशासन द्वारा बनाई गई बाढ़ चौकियों से कर्मचारी नदारद है। पशुओं के चारे की व्यवस्था करना भारी पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए घंटों नाव के आने का इंतजार करना पड़ रहा है। चक्की हाजीपुर गांव लगभग एक महीने से बाढ़ के पानी से चारों ओर से घिरा हुआ है। ग्राम प्रधान ईनरावती देवी ने बताया कि गांव के लगभग एक दर्जन बच्चे अनुष्का आठ, अंशिका नौ, सुधा नौ, खुशी सात, पूजा पांच आदि बीमार हैं। गांव के कई बुजुर्ग भी बीमार है। गांव के लोगों को किरासन तेल और राशन की समस्या बनी हुई है। अगर गांव के संपर्क मार्ग को महुला-गढ़वल बांध से ऊंचाकर जोड़ दिया जाता तो आवागमन की समस्या दूर हो जाती।
दो दिनों से नदी के जलस्तर में बढ़ाव जारी ः बुधवार की शाम चार बजे बदरहुंआ नाले पर घाघरा का जलस्तर 71.72 मीटर और डिघिया नाले पर 70.75 मीटर दर्ज किया गया था। गुुरुवार की शाम चार बजे बढ़कर बदरहुंआ नाले पर 71.76 और डिघिया नाले पर 70.81 मीटर पर पहुंच गया। जो बदरहुंआ नाले पर खतरा बिंदू 71.68 मीटर से चार सेमी और डिघिया नाले पर खतरा बिंदू 70.40 मीटर से 35 सेमी ऊपर है।