आजमगढ़। जिले में करोड़ों खर्च के बाद भी जर्जर तारों व विद्युत पोल के भरोसे आपूर्ति हो रही है। जिसके कारण हमेशा हादसे होते रहते हैं तो वहीं विद्युत आपूर्ति भी बाधित होती है। अक्सर ही कहीं न कहीं तार टूट कर गिर जाते है तो वहीं इन जर्जर तारों के चलते होने वाली शार्ट सर्किट से ट्रांसफार्मर भी जल जा रहे है। सरकार ने जर्जर पोलों की जगह नए पोल लगाने व जर्जर तारों के स्थान पर अलग-अलग क्षमता की एबी केबल लगाने की योजना शुरू किया है। लेकिन अभी भी जर्जर तार व पोल से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति हो रही है। जनपद में विद्युत सप्लाई के लिए जो पोल व तार लगाए हैं वह काफी पुराने है। जर्जर तारों के कारण कई जगहों पर जानमाल का नुकसान भी हो चुका है। गर्मी के सीजन में तो यही जर्जर तार किसानों की सैंकड़ों बीघा गेहूं की फसल को जलाकर राख कर देते हैं। जर्जर तारों व खंभों से बिजली आपूर्ति में आ रही समस्या व हो रही जान माल की क्षति को देखते हुए सरकार ने सौभाग्य योजना, पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना व रीहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट के तहत कई करोड़ रूपए खर्च किए, जिससे कई जगहों पर पोल व तार बदले गए। लेकिन कई जगहों पर जर्जर तार व पोल आज भी समस्या का जड़ बने हुए हैं। शहर के मुख्य चौक, कुर्मीटोला, डीएम कार्यालय के पीछे, सिधारी, शाहगढ़, बूढ़नपुर, सगड़ी व पवई आदि क्षेत्रों में जर्जर विद्युत तार व पोल के सहारे बिजली की सप्लाई की जा रही है।
सौभाग्य योजना में 8,654 मजरों का हुआ विद्युतीकरण
आजमगढ़। जिले में 180.97 करोड़ की लागत से सौभाग्य योजना फेज-1 व फेज-2 के तहत 8,654 मजरों में विद्युतीकरण हुआ है। इसके अलावा पांच पावर ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्घि का कार्य कराया गया। इस योजना के तहत फेज-3 में 1,737 मजरों में कार्य होना है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 19 पावर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्घि के साथ ही 156 मजरों का विद्युतीकरण कराया गया। 85 करोड़ की लागत से 49 कृषि फीडरों का निर्माण हुआ है।
रीहैबिलिटेशन के तहत 85 मजरों में कार्य अधूरा
आजमगढ़। सुचारू रूप से विद्युत सप्लाई के लिए उत्तर प्रदेश पावर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क रीहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट के तहत जनपद में 4,65 मजरे चयनित हुए हैं। इन मजरों म्रें पुराने जर्जर पोलों व तारों को हटाकर इनके स्थान पर नए पोल व तारों की जगह एबी केबल लगाना है। हाल यह है कि अभी तक चयनित 380 मजरों में ही कार्य पूरा हो पाया है। शेष मजरों में कार्य चल रहा है। इस योजना के तहत 5600 नए पोल व 480 किमी. विभिन्न क्षमता के एबी केबल लगाया गया है। अगस्त माह बीतने को हैं लेकिन 85 गांवों में अभी भी कार्य अधूरा है।
विद्युत खंड द्वितीय के अधीक्षण अभियंता सैयद अब्बास रिजवी ने बताया कि अनेक योजनाओं के तहत कई मजरों में जर्जर तारों व पोलों को बदला जा चुका है। रीहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट में चयनित मजरों का कार्य अगस्त माह में पूरा हो जाएगा। इसके अलावा जनपद में छूटे मंजरों का रिवैंप योजना में चयन किया गया है। डीपीआर पास होते ही इन मजरों में भी बिजली के तार और खंभे बदलने का काम शुरू हो जाएगा।