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नीलगायों का खौफ, छोड़ दिया सब्जी उत्पादन

Fri, 10 Jun 2016 11:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
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land - फोटो : डेमो पिक
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जिले के किसान सिर्फ दैवीय आपदाओं से ही नहीं बल्कि नीलगायों के आतंक से भी परेशान हैं। अगर मौसम ने साथ दिया और फसल अच्छी हुई तो नीलगायों का झुंड उसे चट कर जाता है या रौंदकर उसे नष्ट कर देता है। हालांकि शासन ने फसल सुरक्षा के लिए नीलगायों को मारने का आदेश दिया है जिसकी अनुमति जिला प्रशासन से ली जाती है लेकिन अभी तक किसी ने इसकी अनुमति नहीं ली है।
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अंबारी संवाददाता के अनुसार फूलपुर  तथा मार्टिंनगंज तहसील में  नीलगायों के प्रकोप से किसानों की  भारी क्षति होती है।

नील गायों का प्रकोप अधिकतर नदियों के तराई इलाकों में होता है। नील गाय अधिकतर सब्जी, चना, मटर, गन्ना, गेहूं की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। इस क्षेत्र मार्टिंनगंज, फूलपुर, अहरौला, पवई, ब्लाक के तराई इलाकों में नीलगायों का झुंड निकलता है और फसलों को बर्बाद कर देता है। मलगाँव के किसान कृष्ण मोहन मिश्रा कहना है  नील गायो का प्रकोप अधिकतर सब्जी, दलहन एवं तिलहन की खेती पर होता है जिससे किसानों को  भरी क्षति होती है। इस नुकसान की भरपायी के लिए सरकार की तरफ से योजना नहीं है। मालटारी संवाददाता के अनुसार सगड़ी तहसील क्षेत्र में नीलगायों के डर से लोग सब्जी की खेती नहीं करते हैं। जो लोग करते हैं, रात भर जगकर फसलों की रखवाली करते हैं। तहसील क्षेत्र के नरहन, मंझरिया, बोझिया सहित दर्जनों गांवो में नीलगाय काफी नुकसान पंहुचाते हैं। नरहन गांव के विजयी मौर्य, बोझिया के श्रीप्रकाश मौर्य, मनिकाडीह के सुनील मौर्य, पुरा बालनरायन के राजेश गिरी ने बताया कि नीलगायों से फसलों को बचाने के लिए लाठी डंडा लेकर पूरी रात जगकर रखवाली करनी पड़ती है। साथ ही पटाखे छोड़ने पड़ते है।

कभी-कभी नील गाय लोगों को घायल कर देते ह ैं। गोरिया बाजार संवाददाता के अनुसार बिलरियागंज क्षेत्र के  शेरपुर, बरोही फतेहपुर, अकबरपुर, भैंसहा,  बालमपट्टी, बरामदपुर, जैगहा, सियरहा, पटवध, नसीरपुर, खानपुर भगतपट्टी आदि गांव नीलगायों से त्रस्त हैं। भैंसहा के घनश्याम मौर्य ने बताया कि सब्जी की खेती, अरहर की फसल, गेहूं की फसलों को बचाने के लिए खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। नीलगायों का झुंड फसलों को बर्बाद कर दे रहा है। खेतों में बिजूका से कुछ हद तक सफलता मिलती है। बाग-बगीचों की अंधा-धुंध कटाई ताल पोखरों के सूखने की वजह से अब आबादी के बगल भी दिख जा रहे हैं। लाटघाट संवाददाता के अनुसार देवारा में नीलगाय के आतंक से लोग सब्जी बोना बद कर दिऐ। हरैया ब्लाक के बेलहिया गांव के प्रधान राजमन यादव का कहना है कि गन्ने की पुआरी को नीलगाय नष्ट कर दे रहे है। गांव के ही शिवप्रसाद, जगरोपन, सतिराम यादव आदि नीलगायों के आतंक से परेशान हैं।
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अहरौला संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के किसान नीलगायो के आतंक से परेशान है। धरौली के किसान रामनयन सिंह, गोपालीपट्टी के रामसिंह पालीवाल, कोठरा के रामअवध यादव, सीरपट्टी के ओमकार आदि का कहना है कि नीलगाय किसानों की दुश्मन हैं। फसलें बर्बाद कर दे रही हैं। मेहनगर संवाददाता के अनुसार नीलगायों के आतंक से क्षेत्र के किसानों ने जायद की खेती छोड़ दी है। नीलगाय का सबसे ज्यादा आतंक क्षेत्र के करौती, खजुरा, करनेहुवॉ, गोपालपुर, देवरिया, हटवा, सरदारगंज, बछवल, जियासड़, किशुनदासपुर, खरिहानी, लोहानपुर, गुरेहथा, देवकली, मानपुर, खरगपुर, कटहन, सिंहपुर आदि गॉवों में हैं। खेवसी पुर के मुकुटधारी यादव, बिसानी के विजय बहादुर सिंह ने कहा कि नीलगाय के आतंक से किसान जायद फसल लगाना बंद कर दिए। मेजवां संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के मेजवां, दसमड़ा, नोनियाडीह, मक्खापुर, अतरडीहा, कंदरी, खुरासों, मनरा, बनबीरपुर, अहरौला, कोल, दुर्वासा, लाहीडीह, माहुल, उफरी, रज्जाकपुर, जगदीशपुर आदि सैकडों गांव के किसान नीलगाय से परेशान हैं।
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