आजमगढ़। फार्मर रजिस्ट्री न कराने वाले किसानों की आने वाले खरीफ सीजन में परेशानी बढ़ सकती है। अब निजी दुकानों से भी उर्वरक लेने पर उन्हें फार्मर आईडी दिखानी पड़ेगी। बिना फार्मर आईडी वाले किसानों को उर्वरक देने पर कृषि विभाग दुकानों का लाइसेंस निरस्त कर सकता है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 8.27 लाख किसान हैं। शासन की तरफ से प्रदेश में एक जून से फार्मर आईडी अनिवार्य करने की बात कही गई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि मंडी, क्रय केंद्रों के अलावा गांवों में कर्मचारियों द्वारा किसानों की फार्मर आईडी तैयार की जा रही है। लगभग 6.65 लाख किसानों की फार्मर आईडी तैयार कर ली गई है। अन्य की 30 अप्रैल तक तैयार की जानी है। उन्होंने बताया कि खाद भंडारण पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन की तरफ से निजी दुकानदारों को फार्मर आईडी वाले किसानों को ही उर्वरक बेचने का निर्देश दिया गया है। इसमें लापरवाही मिलने पर विभाग संबंधित दुकान का लाइसेंस भी निरस्त कर सकता है। जिले में करीब एक हजार उर्वरक की दुकानें संचालित होती हैं। इसके अलावा 250 साधन सहकारी समितियां हैं। समितियों पर तो पहले ही फार्मर आईडी से उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू कर दी गई है, लेकिन अब निजी दुकानों पर भी इसी व्यवस्था के तहत उर्वरक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
दो लाख हेक्टेयर में होती है धान की खेती
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि खरीफ सीजन में जिले में प्रमुख रूप से धान की ही खेती की जाती है। हर साल दो लाख हेक्टेयर से अधिक रकबा धान फसल का रहता है। इसलिए जिन किसानों की अभी तक फार्मर आईडी नहीं बन पाई है वह कृषि, राजस्व विभाग के कर्मचारियों से संपर्क कर जल्द से जल्द फार्मर आईडी तैयार करवा लें।
उर्वरक और विभागीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी गई है। प्रशासन की तरफ से फार्मर आईडी वाले किसानों को ही निजी दुकानों से उर्वरक देने का निर्देश दिया गया है। किसान 30 अप्रैल तक अपनी फार्मर आईडी बनवा लें।- डॉ. गगनदीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।