आजमगढ़। जिला अस्पताल के हर काम में खेल है। मरीजों को इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है, डॉक्टर समय से ओपीडी में नहीं बैठ रहे हैं तो वहीं अब अस्पताल के उपस्थिति पंजिका में भी फर्जी हस्ताक्षर कर अनुपस्थित को उपस्थित दिखाकर वेतन जारी करने का नया मामला आ गया है। जबकि एसआईसी ने स्वयं फर्जी हस्ताक्षर पकड़ा था और संबंधित कर्मचारी की उपस्थिति पंजिका पर हुए हस्ताक्षर को काट कर अनुपस्थित लगा दिया था। मीडिया के संज्ञान में मामला आते ही एसआईसी जांच की बात कह कर खुद को बचाने में जुट गए हैं।
जिला अस्पताल में तैनात नेत्र सहायक सुबाष सिंह बीते दो माह से अनुपस्थित चल रहे हैं। एसआईसी के अनुसार उनका एक्सीडेंट हुआ है। इसके बाद भी उपस्थिति पंजिका पर अगस्त व सितंबर माह में उनका हस्ताक्षर हुआ है। इतना ही नहीं अगस्त का उनका वेतन भी जारी कर दिया गया है। जबकि एसआईसी ने नेत्र सहायक के अनुपस्थित होने के बाद भी उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर की जानकारी होने पर रजिस्टर में हरे पेन से उसे काट दिया था और उन्हें अनुपस्थित दर्शाया था। इसके बाद भी उनका वेतन जारी हो जाना समझ से परे है।
मीडिया के संज्ञान में जब यह बात सामने आई तो एसआईसी ने पहले बरगलाने की कोशिश की। फिर डॉ. ओम प्रकाश को इस फर्जी हस्ताक्षर प्रकरण की जांच दिए जाने की बात कह कर अपना पीछा छुड़ाने का प्रयास किया। नेत्र सहायक सोमवार को अस्पताल पहुंचा था और एक्सीडेंट में घायल होने के चलते ड्यूटी पर न आ पाने की बात एसआईसी से बताई है। अनुपस्थित रहने के बावजूद उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर का होना अस्पताल में बड़े आर्थिक घोटाले व फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रहा है।
रजिस्टर की कापी होने की बात पर भड़क उठे एसआईसी
आजमगढ़। एसआईसी को जब फोन पर उपस्थिति रजिस्टर में नेत्र सहायक के फर्जी हस्ताक्षर होने की बात बताई गई तो वे इसे मानने से इंकार करते रहे। जब यह बताया गया कि रजिस्टर की कॉपी मौजूद है। इस पर वे भड़क उठे। उन्होंने कहा कि पहले तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए जिसने आप को रजिस्टर की कॉपी उपलब्ध कराई है। बाद में प्रकरण की जांच कराने और जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की बात कही।