दशहरा और मोहर्रम का पर्व एक साथ पड़ने के कारण जहां जिला तथा पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर है। वहीं, कुछ स्थानों पर ताजिया रखने के विवाद को दूर करने के लिए प्रशासन प्रयासरत हैं। ऐसी स्थिति में सिधारी थाने के डुगडुगवा गांव के अल्पसंख्यकों ने धार्मिक सौहार्द का परिचय दिया। उन्होंने दशहरा के चलते ताजिया का जुलूस नहीं निकालने का फैसला कर कौमी एकता का नजीर पेश किया है।
गांव के लोगों ने यह भी तय किया है कि जहां कहीं भी जरूरत पड़ी वे हिंदू भाइयों का सहयोग करेंगे। अल्पसंख्यक समुदाय के इस फैसले का पुलिस और दुर्गा पूजा कमेटी के लोगों ने स्वागत किया। सिधारी थाना क्षेत्र का डुगडुगवा गांव शहर से सटा हुआ है। गांव में करीब तीन हजार से अधिक मुसलमान हैं। सिधारी स्थित नए पुल के पास मुख्य मार्केट मेें एक ही जगह रामलीला का मैदान और उससे सटा ताजिया चौक है। मोहर्रम पर समुदाय के लोग ताजिए का जुलूस लेकर डुगडुगवा से निकलते हैं।
अखाड़ा खेलते हुए ताजिए चौक पर पहुंचते हैं। इस वर्ष जिस दिन मोहर्रम की नौवीं है, उसी दिन नवरात्र की दशमी है। नवरात्र के अवसर पर सिधारी मुहल्ले में भव्य दुर्गा पूजा का पंडाल और मेला लगता है। मोहर्रम की नौवीं और नवरात्र की दशमी एक साथ होने की वजह से प्रशासन के समक्ष दोनों त्यौहारों को सकुशल संपन्न कराना चुनौती बना हुआ था। इसे लेकर एसओ सिधारी रामनरेश यादव ने थाने में अल्पसंख्यकों की बैठक बुलाई। बातचीत के दौरान लोगों ने सर्वसम्मति से भाईचारगी की मिशाल पेश करते हुए निर्णय लिया कि इस बार ताजिए का जुलूस नहीं निकाला जाएगा।
डुगडुगवा अखाड़ा के मालिक आफताब, मो. अतहर, अब्दुल कयूम सहित अन्य लोगों की ओर से लिए गए इस निर्णय का पूजा पंडाल संचालकों समेत गांव के लोगों ने स्वागत किया है। ग्राम प्रधान मतीन खान ने बताया कि दशहरा के पर्व को देखते हुए इस वर्ष ताजिए का जुलूस न निकालने का निर्णय लिया गया है। अगले वर्ष पूर्व की भांति मोहर्रम का त्यौहार संपन्न होगा। सिधारी थानाध्यक्ष रामनरेश यादव ने कहा कि डुगडुगवा गांव के अल्पसंख्यकों ने मोहर्रम का जुलूस न निकालने का फैसला कर धार्मिक सौहार्द का परिचय दिया है। प्रशासन की मुश्किलें हल हो गई हैं।