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नदी किनारे फेका मिला एक्सपायरी दवाओं का जखीरा

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अमर उजाला की सूचना पर बाग लखरांव पुल के पास फेंकी गई दवाओं का सैंपल लेते स्वास्थ्य विभाग के अधिका? - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। सरकारी अस्पतालों पर एक तरफ जहां मरीजों को दवाएं नहीं मिलती है तो वहीं भारी मात्रा में सरकारी एक्सपायर दवाओं का जखीरा तमसा नदी के तट पर फेंका हुआ मिला है। भारी मात्रा में दवाओं के साथ ही कोलगेट पेस्ट भी फेंका था, जिसे लोग बटोर ले गए। पेस्ट भी एक्सपायर बताया जा रहा है। हालांकि खराब दवाएं से नदी के पानी के प्रदूषित होने की भी पूरी संभावना है।
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दवाओं का खेल जिले में काफी समय से चल रहा है। मरीजों को दवाएं मिलती नहीं है और अस्पतालों के जिम्मेदार दवाओं को बांटने के बजाए रख कर ही एक्सपायर कर देते है और फिर उन्हें नदी व तालाबों के किनारे फेंक कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर लेते है। अभी हाल में ही जिलाधिकारी ने जिला महिला अस्पताल के एक कमरे में भारी मात्रा में बंद पड़ी दवाओं को पकड़ा था। जिसमें काफी मात्रा में दवाएं एक्सपायर हो चुकी थी। संभावना तो यह भी व्यक्त की जा रही है कि महिला अस्पताल की ही दवाएं वहां फेकी गई है, हालांकि यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। भारी मात्रा में सरकारी दवाओं व कोलगेट पेस्ट फेके जाने की जानकारी होते ही मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। कई राहगीरों ने कोलगेट पेस्ट को उठा कर प्रयोग करने के लिए भी लेते गये है।
नदी किनारे एक्सपायरी दवाओं को फेंका जाना गलत है। एसडीएम सदर को भेज कर दवाओं को कलेक्ट कराया जा रहा है। इसके बाद टीम बना कर इसकी जांच करायी जायेगी। जांच में भी जिस भी सरकारी दवा स्टोर की यह दवाएं होंगी निश्चित तौर पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। यह भी संभव है कि मेरे निरीक्षण के दौरान एक्सपायरी दवाएं न मिलने पाये, इससे बचने के लिए इन दवाओं को नदी किनारे फेका गया हो।
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नागेंद्र प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी, आजमगढ़।
जांच के लिए डीएम ने गठित की तीन सदस्यीय टीम
आजमगढ़। तमसा नदी किनारे फेके मिले दवाओं की जांच के लिए जिलाधिकारी एनपी सिंह ने तीन सदस्यी कमेटी गठित कर दी है। सीएमओ डॉ. एके मिश्रा के नेतृत्व में बनी कमेटी में एडिशनल सीएमओ डॉ. संजय के साथ ही एसडीएम सदर को शामिल किया गया है। डीएम ने टीम को निर्देश दिया है कि जांच कर यह पता लगाये कि उक्त दवाएं किस स्टोर की है और कहां से लाकर फेकी गई है। डीएम ने बताया कि मौके से बरामद दवाओं में सिर्फ सरकारी दवा ही नहीं बल्कि कुछ प्राइवेट कंपनियों की भी दवाएं है। जांच के बाद संबंधित के खिलाफ एनजीटी के नियमों के तहत कार्रवाई होगी। वहीं सरकारी दवा किन परिस्थितियों में एक्सपायर हुई इसकी भी जांच करायी जायेगी।
जिम्मेदारी से भागते नजर आये जिम्मेदार
जिले में सरकारी दवाओं के कई स्टोर है। जिसमें कुछ स्टोर सीएमओ के अधीन आते है तो कुछ मंडलीय अस्पताल व जिला महिला अस्पताल के अधीन है। अब नदी के निकारे फेकी मिली दवाएं किस सरकारी दवा स्टोर की है यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन स्टोरों के मुखिया अपनी जिम्मेदारी से भागते नजर आये। सीएमओ डॉ. एके मिश्रा ने कहा कि मेरे जानकारी में नहीं है, फिर भी डॉ. संजय को मौके पर पहुंच कर जांच का निर्देश दिया जा चुका है। वहीं सीएमएस महिला अस्पताल का कहना है कि अस्पताल में एक्सपायर दवाएं अभी सुरक्षित रखी हुई है, उन्हें बायो मेडिकल वेस्ट के तहत निस्तारित कराया जायेगा। वहीं मंडलीय अस्पताल के एसआईसी से संपर्क ही नहीं हो सका।
एनजीटी के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां
एक्सपायरी दवाओं के साथ ही मेडिकल वेस्ट का निस्तारण किये जाने के लिए एनजीटी ने विशेष नियम बना रखे है। इसके तहत ही मेडिकल वेस्ट का निस्तारण किया जा सकता है। शासन स्तर से इसके लिए एक कंपनी भी चिन्हित है, जो अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट ले जाकर उसे निस्तारित करती है। इसके बाद भी जिले में लगातार एनजीटी के निर्देशों की अवहेलना हो रही है और धड़ल्ले के साथ मेडिकल वेस्ट आम कूड़े-कचरे के साथ निस्तारित किये जा रहे है।
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रोडवेज बाईपास पर बाग लखरांव पुल के पास भारी मात्रा में फेंकी गई सराकारी दवाएं।- फोटो : AZAMGARH

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