इससे वह निगम का चक्कर काटने का मजबूर हैं। अधिकारियों के अनुसार प्रतिदिन हर वितरण खंड में बिजली बिल में गड़बड़ी के दो से तीन मामले आ रहे हैं। इस प्रकार देखें तो छह वितरण खंडों में महीने में 450 से 500 मामले आ रहे हैं। पहले शिकायत के बाद उपभोक्ता का बिजली बिल तुरंत संशोधित हो जाता था लेकिन अब स्मार्ट के उपभोक्ताओं का बिजली बिल एसआईआर रिपोर्ट के बाद ही संशोधित होगा।
शिकायत के बाद विभाग के जेई, एसडीओ मौक पर जाकर सेंक्शन लोड और उपभोग किए जा रहे उपकरणों के लोड का मिलान करेंगे। इसके बाद साइट इंस्पेक्शन रिपोर्ट के आधार पर बिजली बिल का संशोधन होगा। दोनों के मिलान से उपभोक्ता और विभाग के अधिकारियों को यह पता चल सकेगा कि कितने भार का कनेक्शन है और घर में लगे उपकरणों से कितनी बिजली उपयोग की जा रही है। इससे लाइनलॉस और बिजली चोरी पर जहां लगाम लग सकेगा वहीं, उपभोक्ता को सही बिजली बिल मिल सकेगी।
बिजली बिल में गड़बड़ी के हर दिन दो से तीन मामले आ रहे हैं। शिकायत के बाद उसकी जांच कराई जाती है कि उपभोक्ता के यहां कितने भार का कनेक्शन है और कितना बिजली उपयोग हो रहा है। जांच के बाद सही बिजली बिल दी जाती है। - पीके गुप्ता, अधिशासी अभियंता।