आजमगढ़। ग्राम पंचायतों से निकलने वाल प्लास्टिक और अन्य कचरे के निस्तारण के लिए एमआरएफ और आरआरसी का निर्माण कराया गया है। कुछ जगह निर्माण चल रहा है। कहीं बिजली कनेक्शन न होने तो कहीं अनुबंध न होने के कारण केंद्रों पर ताले लटक रहे हैं। पड़ताल में कुछ ऐसे ही तथ्य सामने आए हैं।
नवीनीकरण न होने से बंद एमआरएफ सेंटर
अमिलो। मुबारकपुर नपा के कूड़ा कचरे का निस्तारण करने के लिए लाखों की लागत से बना एमआरएफ सेंटर बंद पड़ा है। मशीन संचालित करने वाली कंपनी ने मुबारकपुर के पुरा दुल्हन में नगर पालिका मुबारकपुर से अनुबंध किया था। जब कंपनी और नपा मुबारकपुर के बीच हुए अनुबंध का पालन नहीं हुआ और अनुबंध का नवीनीकरण नहीं हुआ तो मशीन का संचालन भी बंद हो गया। अधिशासी अधिकारी विनय कुमार मिश्र ने बताया कि मशीन चलाने की शुरुआत की थी लेकिन ठेकेदार ने बंद करा दिया। इसके बाद से यह बंद है।
सेंटर तो बना लेकिन संचालित नहीं
जहानागंज। नपं जहानगंज के बाजार में एमआरएफ सेंटर बना है लेकिन अभी तक संचालित नहीं हो सका है। ईओ विक्रम कुमार ने बताया कि एमआरएफ सेंटर जहानागंज थाने के पीछे बना है लेकिन अभी पूरा नहीं है। कुछ मशीनरी बाकी है। इसकी लागत 33 लाख की थी। हम लोगों ने शासन को लिख दिया है कि जल्द इसको पूरा किया जाए।
33 लाख से बना, विद्युत कनेक्शन ही नहीं
निजामाबाद। तहसील क्षेत्र के बगल में मिठ्ठनपुर हादी अली गांव के पास एमआरएफ केंद्र बनाया गया है। लेकिन यह संचालित नहीं हो रहा है। इसमें अभी तक विद्युत कनेक्शन नहीं हो पाया है। जबकि कनेक्शन का भुगतान कर दिया गया है। यह मैन्युअल रूप से संचालित है। लगभग 33 लाख की लागत से बनाया गया है। अधिशासी अधिकारी विवेक कुमार ने बताया है कि जल्द ही केंद्र चालू कर दिया जाएगा। वर्तमान में यह मैन्युअली संचालित है।
पवई में 38 तो अहरौला में 25 आरआरसी सेंटर ही पूर्ण
पवई। विकासखंड पवई में कुल 66 आरआरसी का निर्माण होना था। इनमें से 38 पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष निर्माणाधीन हैं। दो आरआरसी विवादित हैं। जहां आरआरसी तैयार हैं, वहां कूड़ा गाड़ी भी खरीदी जा चुकी है। सभी कार्य पूर्ण होने के बाद भी इनका संचालन अभी तक शुरू नहीं हो सका। एडीओ पंचायत राममिलन का कहना है कि सभी ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जो भी आरआरसी तैयार हैं, उनका संचालन सुनिश्चित करें।
पखनपुर में बिजली का कनेक्शन ही नहीं
अहरौला। विकासखंड में 94 ग्राम सभाएं आती हैं, जिसमें से आरआरसी बनाने के लिए 53 गांवों में जमीन चिह्नित की गई है। 25 ग्राम सभा में आरआरसी बने हैं। बाकी जगहों पर या तो निर्माण कार्य प्रारंभिक स्तर में है या टीनशेड लगने की स्थिति में है। कई ग्राम सभा में तो कचरा ढुलाई के लिए तीन पहिया ऑटो रिक्शा भी खरीदा गया है। लोगों का कहना है कि इसे प्रधान व्यक्तिगत कार्यों में प्रयोग कर रहे हैं। पखनपुर ग्राम सभा में 16 लाख की लागत से अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र बनाया गया है। मशीन लगी, ट्रायल भी हो गया लेकिन अब तक यह बिजली का कनेक्शन न होने के कारण बंद पड़ा है।
पखनपुर में बने अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र को अगले महीने तक चालू कर दिया जाएगा। गांवों में भी बन रहे कचरा प्रबंधन केंद्रों पर तेजी से कम हो रहा है। जल्द ही संचालित होने लगेंगे। - आलोक कुमार, बीडीओ अहरौला।