छठ महापर्व की शुरुआत रविवार से हो गई। व्रती महिलाओं ने लौकी भात खाकर व्रत की शुरुआत की। वहीं, जिस तालाब पर उन्हें अर्घ्य देना है, उसकी दुर्दशा देख लोग परेशान हैं कि आखिर किस प्रकार वह लोग यहां पर अर्घ्य देंगी। व्रती महिलाओं के परिवार के लोग घाटों की सफाई और वेदी बनाने के कार्य में जुटे हुए हैं। वहीं, प्रशासन और ग्राम प्रधान द्वारा इस संबंध में कोई कदम न उठाने से उनमें रोष व्याप्त है।
बताते चलें कि इस बार बारिश कम होने से तालाबों में पानी बहुत कम हैं। जिसे देखते हुए बहुत से स्थानों पर व्रती महिलाओं की सुविधा के लिए लोगों ने ट्यूबवेल चलाकर तालाब में पानी भरा है। वहीं बहुत से स्थान ऐसे हैं जहां तालाबों में पानी तो है लेकिन गंदगी इतनी है कि वहां अर्घ्य तो दूर तालाब में उतरना भी मुश्किल है। लोग स्वयं ही घाटों की सफाई आदि करने में जुटे हुए हैं।
वहीं कई स्थानों पर छठ पूजा समितियों द्वारा घाटों की सफाई कराने के साथ ही प्रकाश की भी व्यवस्था करने की पूरी तैयारी है लेकिन इस कार्य को करने में उन्हें काफी धन खर्च करना पड़ रहा है। जिसका परिणाम है कि उनके द्वारा घाटों पर वेदी बनाने के भाव भी बढ़ा दिए गए हैं। वहीं, नगर क्षेत्र में ज्यादातर महिलाएं जीवनदायिनी तमसा के तट पर अर्घ्य देती हैं। लेकिन इस बार बारिश न होने से नदी का पानी भी गंदे पानी में तब्दील हो गया है। हालांकि नगरपालिका द्वारा घाटों की साफ-सफाई जोर-शोर से की जा रही है।