आजमगढ़। डिपो में कार्यरत सभी रोडवेज बस चालकों को श्रेणीबद्ध किया जा रहा है। सबसे अच्छे रोडवेज बस चालकों को ए श्रेणी में स्थान दिया जाएगा। श्रेणी निर्धारण करने में बस चालकों के कौशल और सतर्कता को ध्यान में रखा जाएगा जो बस चालक निम्न श्रेणी में आएंगे, उन्हें प्रशिक्षण दिलाकर उनकी श्रेणियों में बदलाव किया जाएगा।
अपर प्रबंध निदेशक अन्नपूर्णा गर्ग ने सभी डिपो पर बस चालकों की श्रेणियां बनाने के लिए निर्देशित किया है। रोडवेज में प्रतिदिन अच्छा और खराब प्रदर्शन करने वाले बस चालकों की सूची तैयार की जा रही है। अब दुर्घटना के आधार पर भी सतर्कता बरतने वाले चालकों को श्रेणीबद्ध किया जाएगा। जिस चालक के कार्यकाल में सबसे अधिक दुर्घटना होंगी, उसे ई और जिसके कार्यकाल में एक भी दुर्घटना नहीं हुई होंगी उसे बस चालक को ए श्रेणी में रखा जाएगा। अधिकारियों ने इसकी जानकारी देने के साथ रिकार्ड दुरुस्त करना शुरु कर दिया है।
चालक ऐसे कर सकते हैं अपनी श्रेणी में सुधार
- सी, डी, ई श्रेणी के चालकों द्वारा पिछले 12 महीनों में किसी भी प्रकार का हादसा न हुआ हो। उन्हें एक उच्च श्रेणी में लाया जाएगा।
- बी रेणी के चालकों द्वारा पिछले 24 महीनों में किसी भी प्रकार का हादसा न हुआ हो तो उन्हें बी श्रेणी से हटाकर ए श्रेणी में जगह दी जाएगी।
ई श्रेणी वाले चालकों पर हो सकती है कार्रवाई
आजमगढ़। बस चालकों को पांच श्रेणियों में बांटा जाएगा। ए श्रेणी में वह बस चालक होंगे, जिनमें कभी कोई दुर्घटना न हुई हो। बी श्रेणी में उन बस चालकों को शामिल किया जाएगा। जिनसे दुर्घटना में पांच हजार रुपये से कम क्षति हुई और कोई व्यक्ति घायल न हो हुआ हो। सी श्रेणी में उन्हें शामिल किया जाएगा, जिसने हादसे में 50 हजार की क्षति, कोई भी व्यक्ति मामूली घायल हुआ हो और किसी भी मामले के चलते बस थाने में बंद न हुई हो। डी श्रेणी में 50 हजार रुपये की क्षति एवं गंभीर घायल तथा बस सात दिन से अधिक ऑफ रूट रही हो और किसी मामले में बस थाने में बंद हुई हो। सबसे निम्न श्रेणी ई श्रेणी रहेगी। इसमें वह बस चालक शामिल किए जाएंगे, जिनसे हादसे में किसी व्यक्ति की मौत या विकलांगता हो गई है। बी, सी, डी श्रेणी में आने वाले चालकों पर विभागीय जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई तय की जाएगी। ई श्रेणी में आने वाले चालकों की विस्तृत समीक्षा करने के बाद जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
सभी अलग-अलग श्रेणियों में शामिल बस चालकों की अलग-अलग पंजिका बनेगी। इसकी मॉनिटरिंग क्षेत्रीय कार्यालय एवं लखनऊ मुख्यालय से की जाएगी। यदि किसी बस चालक के कार्य में सुधार आता है तो उसकी श्रेणी में भी परिवर्तन होगा।
मनोज बाजपेयी, आरएम आजमगढ़।