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आजमगढ़ को रेलवे की सौगात दिलाने को एक हजार से अधिक दिन तक डॉ. आजमी ने दिया था धरना, अब कहा दुनिया को अलविदा

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मौ. तैयब आजमी, फाइल फोटो - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। थम गई वह आवाज जिसकी गूंज दिल्ली तक सुनी जाती थी। अब नहीं दिखेगा वह शख्स जो किसी का इंतजार किए बगैर ही कलेक्ट्रेट रिक्शा स्टैंड पर धरना देने के लिए हर रोज बैठता था। कोई उसकी नहीं सुनता था लेकिन वह माइक लेकर शासन प्रशासन तक अपनी मांग को पहुंचाने की कोशिश में लगा रहता था। प्रशासन के माध्यम से अपनी मांग को दिल्ली तक पहुंचाता था। आज वह धरने के पर्याय कहे जाने वाले डॉ. मुहम्मद तैय्यब आजमी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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बिलरियागंज नगर पंचायत निवासी डॉ. मुहम्मद तैय्यब आजमी को शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो कलेक्ट्रेट कचहरी जाता हो और न जानता हो। उनका पूरा जीवन संघर्षों में ही बीता। जनपद में रेल सुविधाओं के विस्तार जिसमें कोलकाता, मुंबई, दिल्ली तक रेल सुविधाओं का विस्तार, आजमगढ़ से लखनऊ तक इंटरसिटी ट्रेन चलाने की मांग को लेकर उन्होंने एक हजार से अधिक दिन तक धरना दिया था। वह अकेले ही दरी बिछाकर रिक्शा स्टैंड पर बैठ जाते। कोई आए या न आए वह धरने पर बैठना नहीं छोड़ते थे। कोई सुनने वाला न भी हो तो भी माइक के जरिए शासन और प्रशासन तक अपनी मांगों को पहुंचाने का प्रयास करते थे। इतना ही नहीं धरने के बाद उनके द्वारा प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री, रेल मंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति तक अपनी आवाज को पहुंचाने के लिए ज्ञापन भी सौंपा जाता था। उन्होंने कभी किसी की परवाह नहीं की वह हमेशा अपने उसूलों पर चलते रहे। उनके निधन की सूचना मिलने पर सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ लोगों ने शोक संवेदना व्यक्त की। उनके निधन पर आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति के सचिव एसके सत्येन, विश्वविद्यालय अभियान के संयोजक डा. सुजीत भूषण, छात्रनेता मिर्जाशाने आलम बेग आदि ने इसे अपूरणीय क्षति बताते शोक संवेदना व्यक्त की।
नेतागिरी के कारण भाइयों ने कर दिया अलग
आजमगढ़। तैय्यब आजमी शुरू से ही राजनीति में दिलचस्पी रखते थे लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। कोई भी काम न करने के कारण भाइयों ने इन्हें अलग कर दिया। जिस घर में रहते थे जब वह भी गिर गया तो किराए के मकान में रहने लगे। लेकिन उसका किराया न चुका पाने के कारण कुछ दिन बाद ही उन्हें मकान खाली करना पड़ता। वह निर्दल प्रत्याशी के रूप में सगड़ी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुके थे। विगत लगभग दो महीनों से इनकी सेहत खराब थी। शनिवार की शाम तीन बजे उनका बिलरियागंज में किराए के मकान में निधन हो गया। निधन की सूचना मिलने पर रसूलपुर वार्ड से ससुराल पक्ष के लोग पहुंचे और उन्हें सुपुर्देखाक किया।
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