डॉप्लर रडार की प्रतीकात्मक फोटो।
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सरकार ने पूरे देश को डाप्लर रडार की जद में लाने की योजना तैयार की है। वर्तमान में देश में लगभग 37 डाप्लर राडार लगे है और अब प्रदेश सरकार इसकी संख्या को और बढ़ाने की तैयारी में है। डाप्लर रडार की मदद से मौसम विभाग को 400 किमी क्षेत्र में होने वाले मौसम के बदलाव की सटीक जानकारी मिलेगी। यह रडार डाप्लर प्रभाव का इस्तेमाल कर साइज में सबसे छोटी दिखने वालीं अतिसूक्ष्म तरंगो को भी कैच कर सकती है। जब यह तरंग किसी भी चीज से टकरा कर लौटती है तो यह रडार उसकी दिशा को आसानी से पहचान लेती है।
इसके साथ यह हवा में तैर रहे माइक्रोस्कोपिक पानी की बूंदों को पहचानने के साथ ही उनकी दिशा का भी पता लगाने में सक्षम है। डाप्लर राडार बूंदों के आकार, उनके रफ्तार से संबंधित जानकारी को हर मिनट अपडेट करता है। जिससे डाटा के आधार पर यह पता लगाने में आसानी होगी कि किस क्षेत्र में कितनी वर्षा होगी या तूफान आएगा। कृषि महाविद्यालय, कोटवा के अधिष्ठाता धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि महाविद्यालय में मौसम की जानकारी के लिए सूक्ष्म व्यवस्था है, लेकिन इससे मात्र अधिकतम, न्यूनतम तापमान आदि की ही जानकारी हो पाती है। डाप्लर राडार के बाबत अभी कोई पत्र शासन से नहीं मिला है। यदि ऐसा कोई पत्र मिलता है तो शासन के निर्देशानुसार कवायद की जाएगी।