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फर्श अजा पर बैठना जहमत नहीं रहमत : मौ. वसी

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कैफ़ी आज़मी के पैतृक गांव मेजवा में रविवार को 11वीं मुहर्रम पर अलम, ताबूत और दुलदुल का जुलूस निकाला गया। इससे पूर्व हुई मजलिस में कर्बला के मंजर बयान किए गए। वहीं, अजुमनों ने नौहा मातम किया। जुलूस का समापन इमाम बारगाह में किया गया। जुलूस में अंजुमन अब्बासिया, अंजुमन फरोगे अजा चमावा, अंजुमन डिघिया ने अपने मकसूस अंदाज में नौहा ख्वानी और सीनाजनी की। इससे पूर्व मौलाना वसी मोहम्मद खान ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा की फर्श अजा पर बैठना जहमत नहीं रहमत है। इस्लाम को बचाने के लिए कर्बला के मैदान में छह माह से लेकर छियासी साल के लोगों ने कुर्बानी दी है। जुलूस गांव के विभिन्न अजाखानों से गुजरा और इमाम बारगाह में पहुंच कर समाप्त हुआ। समापन हुआ। जुलूस के साथ आफताब हुसैन, अली अंसर, रेहान, आजादर, अबुल् हसन, साबिर आदि गम का प्रतीक लिबास पहन कर चल रहे थे।
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