शासन के आदेश पर जून माह में हुई अनुदानित मदरसों की जांच में 18 मदरसा शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगा दी गई थी। रजिस्ट्रार की ओर से इसमें नियमों को दरकिनार कर लगभग पांच शिक्षकों का वेतन जारी कर दिया गया है।
ऐसे शिक्षक का वेतन जारी किया गया है जिसने न सिर्फ कम उम्र में नौकरी पाई थी, बल्कि नौकरी के दौरान ही रेगुलर इंटर भी कर लिया था। मिलीभगत से दोषी शिक्षकों का वेतन भी जारी किया जा रहा है।
शासन के निर्देश पर गत वर्ष जून माह में जिलाधिकारी सीबी सिंह ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर जिले के 20 अनुदानित मदरसों की जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट भेजने के बाद रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड की ओर से तीन मदरसों और लगभग 18 मदरसा शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगा दी थी।
अब रजिस्ट्रार की ओर से इसमें कुछ शिक्षकों के मामले को निस्तारित करते हुए वेतन जारी करने पर लगी रोक का हटा दिया गया है। जिनका वेतन रोका गया था इसमें मुबारकपुर के मदरसा बाबु इल्म के अरमान अहमद खान भी थे।
नियुक्ति के समय इनका वेतन कम मिलने पर इसे संदिग्ध माना गया था। रिपोर्ट भेजने के बाद जांच कमेटी के पास एक अन्य तथ्य भी सामने आया था कि इन्होंने नौकरी के दौरान ही रेगुलर इंटर की परीक्षा पास कर डिग्री ली थी।
इस संबंध में भी रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड को अवगत कराया गया था। इसके बाद भी रिपोर्ट को दरकिनार कर इनका वेतन जारी कर दिया गया है। मुबारकपुर के आफिर फहीम मामले की फिर से शिकायत निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, जिलाधिकारी और सीडीओ से की है। सीडीओ अभिषेक सिंह ने बताया कि मामले की शिकायत मिली है, इसकी जांच कराई जाएगी।