प्रतिदिन की तरह सुबह आठ बजे से ही मरीज चिकित्सकों को दिखाने के लिए पर्ची कटाने वाले काउंटर के सामने कतार में लगे हुए थे। पुरुष और महिला दोनों खिड़कियों पर लंबी कतार थी लेकिन किसी भी ओपीडी में चिकित्सक मौजूद नहीं थे। जबकि ओपीडी चलने का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक का है। ओपीडी के बाहर कर्मचारी मौजूद थे जो लोगों के पर्ची जमा कर रहे थे। साथ ही मरीजों के पूछने पर चिकित्सक के 10 बजे आने की बात कह रहे थे। वहीं सफाई कर्मी सुबह नौ बजे तक अस्पताल में झाडू लगाते हुए मिले। एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने वाले कक्ष में एक आदमी बैठकर रजिस्टर पर कुछ लिख रहा था लेकिन सुई लगाने वालों का कहीं अतापता नहीं था। नेत्र सर्जन और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. बीराम सिर्फ अपनी ओपीडी में मिले। बाकी फिजिशियन, हड्डी और जोड़ रोग विशेषज्ञ, प्लास्टिक सर्जन, शिशु और बाल रोग विशेषज्ञ, नाक, कान, गला, हृदय रोग विशेषज्ञ के कक्ष खुले थे लेकिन कुर्सियों से चिकित्सक गायब थे। 8.49 बजे तक दवा वितरण कक्ष की खिड़की भी बंद थी। हालांकि पैथोलॉजी, डिजिटल एक्सरे, पर्ची काउंटर, फीस काउंटर खुले थे।