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एमबीए की प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति से डाक्टर खफा, देंगे इस्तीफा

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आजमगढ़। उप्र सरकार के उस प्रस्ताव का हम विरोध करते हैं जिसमें एमबीए डिग्री धारकों को उप्र चिकित्सा संवर्ग में नियुक्त किए जाने की बात कही गई है। यह बातें मंगलवार को प्रांतीय चिकित्सा संघ के केंद्रीय कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष डा. विनय सिंह यादव ने मंगलवार को मंडलीय चिकित्सालय के सभागार में प्रेसवार्ता के दौरान कही।
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उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपनी हठधर्मिता का त्याग नहीं करती है तो प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ सशर्त सामूहिक त्याग पत्र देने पर विचार कर सकता है। चिकित्सकों का कार्य मानव की सेवा करना होता है। जो अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील कार्य है। इसके लिए प्रत्येक चिकित्सक को चिकित्सा कार्य करने के लिए विशेषज्ञता प्राप्त करना होता है। इनका मूल्यांकन केवल चिकित्सक संवर्ग का अधिकारी ही कर सकता है। राजनैतिक व्यक्ति और ब्यूरोकेसी के द्वारा चिकित्सा संवर्ग पर आनावश्यक, अव्यवहारिक प्रयोग किए जा रहे है। जो असफल हो रहे हैं। कोई भी निर्णय लिए जाने से पहले चिकित्सक संवर्ग से नीतिगत फैसला करते समय सलाह नहीं लिया जाता है। आज संवर्ग की ऐसी स्थिति बना दी गई है कि कोई भी विशेषज्ञ चिकित्सा संवर्ग को ज्वाइन नहीं करना चाहता है। जो कार्यरत है वह भी स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेना चाहता है। कोविड महामारी के बाद यह आवश्यक हो गया है कि सरकार और ब्यूरोकेसी के लोग आत्म अवलोकन करें और कोई व्यवहारिक पालिसी अख्तियार करें। जिससे नए विशेषज्ञ चिकित्सा संवर्ग की ओर आकर्षित हों। पहले से कार्यरत चिकित्सक भयमुक्त होकर पूरी उर्जा के साथ अपना कार्य कर सकें। इस मौके पर जनपद सचिव डा. राजनाथ, मंडलीय सचिव डा. धनंजय पांडेय, डा.आरएस श्रीवास्तव, डा.एलजे यादव, डा. प्रमोद कुमार, डा.सौरव मौर्य, डा. देवानंद यादव आदि उपस्थित थे।
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