जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड का माहौल सोमवार की दोपहर उस समय गरम हो गया जब एक समाचार पत्र में प्रकाशित डाक्टर के दावे को मरीज के परिवारीजनों ने चुनौती दे दी।
पीड़ित महिला के परिवारीजनों ने निजी अस्पताल के डाक्टर पर 92 हजार रुपये लेने और पैसे कम पड़ने पर अस्पताल से निकाल देने का आरोप लगाया।
मय रसीद पीड़ित ने जैसे ही इस राज को खोला, इसकी जानकारी निजी अस्पताल के लोगों को हो गई। इस पर वे अस्पताल पहुंच गए और मीडिया के सामने पीड़ित पर दबाव बनाने लगे।
पीड़ित के परिवारवालों के आरोपों को डाक्टर ने सिरे से खारिज कर दिया। कहा वे अब भी अपने दावे पर कायम हैं।
बताते चलें कि शहर कोतवाली क्षेत्र के लक्षिरामपुर गांव में डा. शिशिर जासवाल का अस्पताल है।
16 जनवरी को डाक्टर ने प्रेसवार्ता कर एक महिला का नि:शुल्क उपचार कर उसे मौत के मुंह से बचाने का दावा किया था। यह खबर एक समाचार पत्र में प्रकाशित हुई।
इसमें उन्होंने बताया था कि जिंदा बची महिला पार्वती कप्तानगंज थाने के नरफोरा गांव निवासी ओमप्रकाश की पत्नी है। पार्वती के पति ने अपनी दो पुत्रियों की हत्या कर उसे कुल्हाड़ी से मारकर घायल कर दिया था।
समाचार पत्र में प्रकाशित खबर की जानकारी पीड़ित परिवार को सोमवार की सुबह हुई। इस पर परिवारवाले नाराज हो गए। उन लोगाें ने डा. के बयान का खंडन किया। कहा उन्होंने उपचार के बदले उनसे 92 हजार रुपये लिए गए हैं।
इसकी रसीद उनके पास है। इतना ही नहीं रुपये कम पड़ने पर डाक्टर ने उसे अस्पताल से बाहर भी निकाल दिया था। पीड़िता के परिवारवालों के आरोप की जानकारी होने पर निजी अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी सदर अस्पताल पहुंच गए और पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने लगे।
दूसरी ओर पार्वती के परिवारीजनों द्वारा लगाए गए आरोप को डा. शिशिर जायसवाल ने सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि आरोप बेबुनियाद है वे अपने दावे पर कायम हैं।
इस बारे में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. वीबी सिंह ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी है। महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वह प्लास्टिक सर्जन डा. सुभाष सिंह की देखरेख में है।
कहा परिवारीजन के आरोपों की जांच कराई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी।