जिलाधिकारी राजेश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीएम ने अधिकारियों को चौकियों की स्थापना कर कर्मचारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाने का निर्देश दिया। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ आने से पूर्व बाढ़ से निपटने की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि बारिश से बंधों पर हुए कटाव को मिट्टी डालकर चुस्त दुरुस्त कर लिया जाए। बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों में प्रकाश की उचित व्यवस्था करते हुए बंधों पर भी सोलर लाइट की व्यवस्था की जाए। बंधे पर बल्ली, पटरा, बांस आदि आवश्यक सामानों का स्टॉक अभी से कर लिया जाए। बाढ़ चौकियां स्थापित की जाए, वहां पर कर्मचारियों की तीन पालियों में ड्यूटी लगाई जाए तथा वहां पर उपस्थिति रजिस्टर अवश्य रखा जाए। डीएम ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के सभी सीएचसी, पीएचसी और आवश्यक मात्रा में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें। बाढ़ आने पर होने वाली बीमारियां बुखार, डायरिया, डेंगू, कालाजार तथा चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से निपटने के लिए दवाओं का पर्याप्त स्टाक रखा जाए। समय से बच्चों का टीकाकरण भी करा दिया जाए। निगरानी समितियों के माध्यम से बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में फागिंग एवं दवाओं का स्प्रेडिंग कराएं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित हैंडपंपों के चबूतरे ऊंचा किए जाएं तथा शौचालय एवं विद्युत की व्यवस्था अभी से कर लें। झोपडी, मड़ईयों वाले स्थानों पर विशेष रूप से प्रकाश की व्यवस्था करें। बंधे के ऊपर बने शौचालयों को भी समय रहते ठीक करें। बंधों के हेवी रेन कट्स पर मिट्टी पिचिंग कार्य को बारिश से पूर्व पूर्ण कराएं। जहां आवश्यक हो मनरेगा से भी कार्य कराएं। बाढ़ से संभावित क्षेत्रों में जानवरों के लिए भूसे एवं चारे का भंडारण किया जाए व जानवरों का टीकाकरण भी समय से कराएं। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में नाव के संचालन का रूट एवं टाइम टेबल बनाकर जनता को अवगत कराएं, ताकि उन्हें आने-जाने में परेशानी न उठानी पड़े। एनडीआरएफ की टीम को बुलाकर आवश्यकतानुसार ट्रेनिंग दिलाएं। बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। तत्काल कम्युनिकेशन प्लान तैयार कर लें, ताकि जरूरत पड़ने पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। इस मौके सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला, एडीएम वित्त एवं राजस्व आदि उपस्थित थे।