दीवानी न्यायालय से पुलिस कस्टडी में बाहर निकलते जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश चौधरी। श्रोत-सो
आजमगढ़। शासन से रोक के बाद भी दस सहायक अध्यापकों के वेतन भुगतान के मामले में बुधवार को जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश चौधरी को कुंवर सिंह उद्यान के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। कोतवाली पुलिस ने राजेश को सीजेएम सत्यवीर सिंह की अदालत में पेश किया जहां से 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले में जिला समाज कल्याण विभाग के पटल सहायक सत्येंद्र बहादुर सिंह के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। सत्येंद्र अभी पुलिस की पकड़ से दूर है।
डिप्टी डायरेक्ट समाज कल्याण आरके चौरसिया ने जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश चौधरी और पटल सहायक सत्येंद्र बहादुर सिंह के खिलाफ आठ मई 2026 को कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता अरुण कुमार सिंह ने 20 फरवरी को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया था कि जिला समाज कल्याण अधिकारी और उनके पटल सहायक ने शासकीय धनराशि का दुरुपयोग किया। सहायक अध्यापकों की जो नियुक्तियां शासनादेश के विपरीत की गईं थीं उन्हें भी वेतन दे दिया। मंडलायुक्त के निर्देश पर डीएम ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की।
इसमें जिला विकास अधिकारी और मुख्य कोषाधिकारी को भी शामिल किया गया। तीन सदस्यीय कमेटी ने पूरे मामले की जांच की और रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। जांच के दौरान शिकायतकर्ता और संबंधित विभागीय अधिकारियों से साक्ष्य, अभिलेख लिए गए। जांच में सामने आया कि कुछ सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां अवैध तरीके से की गई थीं।
शासन ने वेतन भुगतान पर रोक लगा रखा था फिर भी उन्हें वेतन दिया गया। 10 सहायक अध्यापकों को लगभग 51.46 लाख रुपये का भुगतान अनियमित रूप से किए जाने कीपुष्टि हुई। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने जांच रिपोर्ट के साथ कार्रवाई की संस्तुति शासन से की थी। इससे पहले ही पुलिस ने बुधवार को जिला समाज कल्याण अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया।