लाटघाट (आजमगढ़)। घाघरा नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। जलस्तर में कमी तो आई लेकिन नदी अभी भी दोनों खतरा बिंदूओं पर लाल निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर घटने के बाद भी देवारावासियों की मुश्किलें अभी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
मंगलवार की शाम बदरहुंआ गेज पर नदी का जलस्तर 72.34 मीटर और डिघिया गेज पर 71.45 मीटर दर्ज किया गया था। जो बुधवार की शाम घटकर बदरहुंआ गेज पर 72.20 मीटर और डिघिया गेज पर 71.32 मीटर दर्ज किया गया। नदी बदरहुंआ नाले पर खतरा बिंदू 71.68 मीटर से 52 सेमी और डिघिया गेज पर खतरा बिंदू 70.40 मीटर से 92 सेमी ऊपर बह रही है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में बदरहुंआ गेज पर 14 सेमी और डिघिया गेज पर 13 सेमी की कमी आई है। जलस्तर घटने आके बाद भी अभी ग्रामीणों की समस्याओं में कमी नहीं आई है। आज भी बाढ़ के पानी से घिरे गांवों के ग्रामीणों के सामने राशन की व्यवस्था करना भारी पड़ रहा है। महुला गढ़वल बांध तक जाने के लिए उन्हें नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं विस्थापितों के सामने प्रशासन द्वारा वितरण में अनियमितता देखने को मिल रही है। जिसे लेकर विस्थापितों में रोष बढ़ता जा रहा है। प्रशासन द्वारा सूची के हिसाब से राशन का वितरण किया जा रहा है जिसके कारण बहुत से लोगों को राशन नहीं मिल रहा है।
अनाज वितरण के दौरान आपस में ही भिड़े
लाटघाट। सगड़ी तहसील के दाम महुला प्राथमिक विद्यालय में बाढ़ से विस्थापित लोगों में मंगलवार को प्रशासन की ओर से आलू, आटा, चावल, तेल, मसाला, माचिस का वितरण किया जा रहा था। इस दौरान सिर्फ पांच लोगों में प्रशासन की ओर से राशन का वितरण किया गया। जिसमें राम अवध, राम लखन, गोरख, कोमल और राम दरश को मिला। इतने में ही बाकी के लोग आपस में भिड़ गए। राशन न मिलने से नाराज विस्थापितों ने विद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और कहा कि हम विस्थापितों को राशन न मिलने के कारण समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। बच्चे भूखे सो रहे हैं। वहीं लेखपाल मदन मोहन राय ने कहा कि जिसका सूची में नाम था उसको वितरण कर दिया गया।
मंडलायुक्त ने सुनी बाढ़ पीड़ितों की समस्या
लाटघाट। बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने के लिए बुधवार को मंडलायुक्त के रविंद्र नायक देवारा क्षेत्र में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सहदेवगंज, उल्टहवा और औघड़गंज में बाढ़ पीड़ितों की समस्या को सुना। उन्होंने सभी अधिकारियों को समय से कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। मंडलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को हिदायत दी कि दवा की कमी नहीं होनी चाहिए औ न ही इस वजह से किसी मनुष्य या पशु की मौत नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पशु टीकाकरण का कार्य समय से करा लेना जरूरी है। बाढ़ पीड़ितों के साथ कोई दुर्घटना न हो इसके लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सचेत रहना होगा। एक व्यक्ति शासन से मिलने वाले लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।