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साहित्य उत्सव में बदलते हुए जनतंत्र पर विमर्श

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आजमगढ़। सूत्रधार संस्थान द्वारा शारदा टॉकीज में आयोजित पहले आजमगढ़ सहित्य उत्सव के पहले दिन सोमवार को तीन सत्रों में अलग-अलग विषयों पर चर्चा हुई। विद्वानों ने तीनों सत्रों में निर्धारित विषयों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्य की भूमिका पर प्रकाश डाला।
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पहले सत्र में हिंदी के जाने-माने कथाकार शिव मूर्ति ने ‘‘बदलता हुआ जनतंत्र और साहित्य की भूमिका’’ विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने सरकार के चरित्र और स्वभाव को रेखांकित किया। उनका कहना था कि सरकारें जब विपक्ष में होती हैं तो उनके पास हजारों गलियां होती हैं निवारण की लेकिन जब वह सत्ता में आती हैं तो फिर वह सारे दरवाजे सारी गलियां हों या सारी खिड़कियां बंद हो जाती हैं। संचालन कथाकार हेमंत कुमार ने किया इसके बाद अपनी जिंदगी के लिए मशहूर पूर्व कैदी और जोकहरा लाइब्रेरी के लाइब्रेरियन सुधीर शर्मा के जीवन में साहित्य कैसे असर डाला और अपराध की दुनिया से निकल कर सफल लेखक बन पाए हैं। इस विषय पर चर्चा करते हुए अभिषेक पंडित ने बताया। जाने-माने फिल्म पटकथा लेखक, नाटक लेखक इम्तियाज हुसैन के नाटक ‘‘फरिश्ते’’, विजय तेंदुलकर के नाटक ‘‘पंछी ऐसे आते हैं’’ उर्दू तर्जुमा है का गंभीर पाठ किया। इस मौके पर संतोष चौबे, कंचन मौर्य, पूजा पांडेय, नित्यानंद मिश्रा, अंगद कश्यप, सूरज यादव, रितेश रंजन, अखिलेश द्विवेदी, सत्यम पांडेय, ममता पंडित समेत कई प्रबुद्घजन मौजूद रहे। दो दिवसीय पहले साहित्य उत्सव में मंगलवार की दोपहर 12 बजे से 5 बजे तक कुल चार सत्रों में संवाद आयोजित किए गए हैं। जिसमें जबलपुर से जाने माने नाटककार आशीष पाठक, देश के ख्यातिलब्ध युवा कवि व्योमेश शुक्ला के साथ साथ स्थानीय डा. सोनी पांडेय, संतोष चौबे, संगीता सिंह, डा.आशा सिंह, डा. पूजा पांडेय, जगदंबा दुबे, रमेश कुमार आदि प्रतिभाग करेंगे।
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