अतरौलिया थाना क्षेत्र के अकबेलपुर गांव निवासी सपा नेता राजबहादुर यादव की नौ जनवरी की सुबह हुई हत्या में नामजद पांच आरोपियों में से तीन का पुलिस ने नाम निकाल दिया। इनके स्थान पर दो अन्य लोगों का नाम जोड़कर उन्हें आरोपी बना दिया।
इस बात की जानकारी होने पर राजबहादुर के घर वालों ने प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार से गुहार लगाई। प्रमुख सचिव ने डीआईजी आजमगढ़ को पूरे मामले की जांच सौंपी है कि आखिर किन परिस्थितियों में प्रभारी निरीक्षक अतरौलिया ने आरोपियों का नाम जोड़ा और घटाया है। प्रमुख सचिव अरविंद कुमार के निर्देश पर डीआईजी ने इस घटना से जुड़े सारे रिकार्ड तलब किया है।
सपा के राष्ट्रीय महासचिव बलराम यादव के करीबी अतरौलिया थाना क्षेत्र के अकबेलपुर गांव निवासी राजबहादुर यादव सपा का सक्रिय अतरौलिया विधान सभा क्षेत्र के प्रभारी थे। वह नौ जनवरी की सुबह घर से टहलने के लिए निकले। इसके बाद घर वापस नहीं लौटे।
बाद में राजबहादुर की लाश घर से थोड़े दूर पर स्थित गांव के इंटर कालेज के पास मिली। घटना के संबंध में राजबहादुर के छोटे भाई उमाशंकर ने घटना के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें गांव के ओमप्रकाश तिवारी, कृष्णपाल तिवारी, अंकूर, अंकित और रवि तिवारी को नामजद किया।
घटना की जांच प्रभारी निरीक्षक अतरौलिया शिशिर त्रिवेदी को सौंपी गई। गहन जांच पड़ताल के दौरान पुलिस ने अंकूर तिवारी, अंकित और रवि तिवारी का नाम मुकदमे से निकाल दिया। पुलिस का तर्क था कि यह तीनों घटना के समय घर पर मौजूद ही नहीं थे।
जबकि प्रमुख हत्यारोपी के तौर पर इनके रिश्तेदार कप्तानगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले चंद्रकुमार और नंदकुमार का नाम शामिल करते हुए चंद्रकुमार, ओमप्रकाश और कृष्णपाल को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया। जबकि नंदकुमार अभी तक गिरफ्तार नहीं हो सका।
उधर मुकदमे से तीन आरोपियों का नाम निकाले जाने से नाराज राजबहादुर के घर वाले प्रमुख सचिव गृह से मिलकर शिकायत की। जिस पर प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र के पूरे मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की आख्या मांगी है।
प्रमुख सचिव की तरफ से 16 मार्च को जारी आदेश मिल चुका है। घटना से जुड़े सारे रिकार्ड प्रभारी निरीक्षक अतरौलिया से तलब किया गया है। मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। - विजय भूषण, डीआईजी, आजमगढ़ परिक्षेत्र