आजमगढ़। जनपद के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय आजमगढ़ महोत्सव के तीसरे दिन शुक्रवार को हरिऔध कला केंद्र में जल संरक्षण समस्या एवं समाधान विषय पर कार्यशाला आयोजित की गयी। मुख्य वक्ता राज्य भूजल पुरस्कार प्राप्त इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने ऑडियो विजुअल शो के माध्यम से बताया कि पृथ्वी पर उपलब्ध कुल भूजल के सापेक्ष भारत में चार प्रतिशत ही शुद्ध जल उपलब्ध है, जबकि भारत की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का 18 प्रतिशत है। वर्षा जल का केवल 8 प्रतिशत ही भूगर्भ जल के रिचार्ज में उपयोग हो पता है। अधिकांश वर्षा जल पक्की छत, पक्की नालियों, पक्की सड़कों से होते हुए नदी के रास्ते समुद्र में चला जाता है। पानी की मांग और आपूर्ति का यह अंतर ऐसे ही बढ़ता रहा तो 2030 तक मांग दोगुनी हो जाएगी और आपूर्ति आधी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि कृषि में सिंचाई के लिए ड्रिप इरीगेशन का उपयोग करके 60 से 70 प्रतिशत तक पानी बचाया जा सकता है। एक किलोग्राम चावल पैदा होने में 2000 से 3000 लीटर पानी का उपयोग होता है। आजमगढ़ जनपद में घाघरा नदी एवं तमसा नदी सहित कुल 13 नदियां एवं 144 ताल -तालाब तथा छोटे-बड़े ताल हैं। जिसमें ताल सलोना लगभग 78 एकड़ का है। उन्होंने छात्रों को दैनिक जीवन में पानी की बर्बादी रोकने के टिप्स भी दिए। छात्रों को नदियों एवं तालाबों में पॉलिथीन एवं प्लास्टिक बोतल न फेंकने के लिए भी जागरूक किया गया। इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन रेफरी अजेंद्र राय, भूगर्भ जल विभाग के हाइड्रोलॉजिस्ट आनंद प्रकाश, अवर अभियंता राशिद, आईटीआई के शिक्षक अनीश सिद्दीकी, सुमित वर्मा, रवि पाठक, शुभम, राहुल आदि उपस्थित रहे।
ऐसे बचा सकते हैं भूगर्भ जल
पानी की टंकी ओवरफ्लो से एक मिनट में 100 लीटर शुद्ध पानी बर्बाद हो जाता है, इसमें वॉटर अलार्म लगाकर इसको रोका जा सकता है।
सबमर्सिबल पंप से 10 मिनट कार धोने में लगभग 1000 लीटर पानी बर्बाद होता है। बाल्टी में पानी भरकर कार धोने में दो बाल्टी पानी उपयोग होता है, जिससे लगभग 900 लीटर पानी बचाया जा सकता है।
एक खुले नल से एक मिनट में 6 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है, नल खोलकर 10 मिनट दाढ़ी बनाने पर 60 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है, जबकि मग में पानी भरकर दाढ़ी बनाने में पर 1 लीटर पानी उपयोग होग, इससे 59 लीटर पानी बचाया जा सकता है।
नल की टपकती बूंदों से एक दिन में 5 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। नल दुरुस्त करा कर इस पानी की बर्बादी को रोका जा सकता है।
100 वर्ग फुट के छत पर रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने से बरसात में वर्षा जल का लगभग एक लाख लीटर पानी भूगर्भ में रिचार्ज किया जा सकता है।