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Azamgarh News: आवारा हवा का झाेंका हूं... बह निकला हूं पल दो पल के लिए

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आजमगढ़। राजकीय पालिटेक्निक कॉलेज परिसर में आयोजित हो रहे आजमगढ़ महोत्सव-2024 की शुक्रवार की तीसरी शाम मशहूर गायक अल्ताफ रजा के नाम रही। इस दौरान स्कूली बच्चों के साथ ही डांसिंग ग्रुप की प्रस्तुति ने कार्यक्रम स्थल पर मौजूद दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। शो स्टॉपर के तौर पर आए अल्ताफ राजा ने अपने गजल एवं कव्वाली से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे ही उन्होंने आवारा हवा का झोंका हूं... बह निकला हूं पल दो पल के लिए गाना शुरू किया दर्शक अपनी जगह खड़े होकर झूमने लगे। जैसे ही अल्ताफ रजा ने तुम तो ठहरे परदेसी सुनाया, पूरा पंडाल शोर से गूंज उठा। श्रोता अपनी जगहों पर खड़े होकर नाचने लगे। इसके पूर्व महोत्सव के तीसरे दिन सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, लालगंज के बच्चों ने समूह गायन, पाल्हन देव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बच्चों ने समूह नृत्य, जनता विद्यालय इंटर काॅलेज, मेहनाजपुर ने एकांकी की प्रस्तुति, कूबाजी पीजी काॅलेज वेरियापुर नेवादा के बच्चों ने समूह गायन, जयनाथ मेमोरियल महाविद्यालय हरई रामपुर के बच्चों ने समूह नृत्य, कूबा पीजी काॅलेज दरियापुर नेवादा ने एकांकी की प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। इसी के साथ ही ऑडिशन में चयनित कलाकार महेंद्र शिल्पकार, सोनू यादव, चंद्र प्रताप, राजेश रंजन, अर्चना राज, रवि पांडेय, अमरजीत यादव, अलंकार सिंह, सुभद्रा मिश्रा, रहीम आजमी, मोहन मिश्रा व शीतला मिश्रा ने लोक गीत की प्रस्तुति दी। इसके बाद इंडिया गॉट टैलेंट फेम ब्रदर्स बांड डांस ग्रुप ने ग्रुप डांस की शानदार प्रस्तुति दी। समस्त कलाकारों को अंगवस्त्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही दैनिक लकी ड्रा कूपन के विजेताओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश संजीव शुक्ला रहे। इस अवसर पर सीडीओ परीक्षित खटाना, एडीएम राहुल विश्वकर्मा, एडीएम आजाद भगत सिंह, सीआरओ विनय कुमार गुप्ता, सीटीओ अनुराग श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।
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बूढ़ी काकी की प्रस्तुति ने मोहा मन
आमगढ़। महोत्सव के क्रम में शुक्रवार की शाम हरिऔध कला केंद्र में मुंशी प्रेमचंद की कहानी बूढ़ी काकी का मंचन रंगकर्मी अभिषेक पंडित के निर्देशन में हुआ। बूढ़ी काकी विधवा और अकेली है। उसने अपनी सारी संपत्ति अपने भतीजे बुधिराम के नाम कर दी है। बदले में बुधिराम और उसकी पत्नी रूपा उसकी देखभाल करते हैं। बूढ़ी काकी सारा दिन अकेली कोठरी में बैठी रहती हैं इस प्रकार उनके जीवन व्यतीत हो रहा है। इस हृदयस्पशीZ नाटक का सुखद अंत होता है।
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