जिला अस्पताल में कांस्टेबल की मौत के बाद पहुंची पुलिस।
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आजमगढ़। जिला अस्पताल इलाज के लिए पहुंचे पीएसी गोरखपुर में बतौर कांस्टेबल तैनात एक व्यक्ति की ऑक्सीजन के आभाव में रविवार को मौत हो गई। वहीं, शनिवार रात में ही तीमारदारों ने अपने छह मरीजों को प्राइवेट अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। इसके पीछे अस्पताल में ऑक्सीजन की किल्लत बताई गई। जिला अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही से मरीजों के परिजनों में नाराजगी है। जबकि अस्पताल प्रशासन आक्सीजन की किल्लत से इंकार कर रहा है। कोरोना के कारण बंद हुई जिला अस्पताल की ओपीडी शुरू हो चुकी है। मरीज भी इलाज के लिए पहुंच रहे है। शनिवार की शाम से रविवार की सुबह 10 बजे तक परिसर में ऑक्सीजन नहीं उपलब्ध था। इसके चलते शनिवार की देर रात छह मरीजों को उनके तीमारदारों ने प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराया। कहा कि मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत थी ऐसे में अस्पताल प्रशासन सिर्फ रेफर पर्ची बनाने की बात कह रहा था। रविवार सुबह मेंहनगर तहसील क्षेत्र के गोला बाजार निवासी 45 वर्षीय लियाकत अली को गंभीर हालत में परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। इमरजेंसी में डॉ. मनोज ने उन्हें देखा और ऑक्सीजन न होने की बात कहते हुए कोरोना की जांच के लिए आईसोलेशन वार्ड में भेज दिया। कोरोना की जांच के बाद ऑक्सीजन की पाइप भी लगाई गई, लेकिन उसमें आक्सीजन नहीं था। एक घंटे बाद रिपोर्ट निगेटिव आने पर उन्हें आईसीयू में भेज दिया गया। यहां भी ऑक्सीजन नहीं था। नर्स अपनी ड्यूटी पूरी हो जाने की बात कह बाहर निकल गई। अनुरोध करने पर कहा कि यहां ऑक्सीजन नहीं है। मरीज को बचाना है तो तत्काल एक निजी अस्पताल का नाम बताकर वहां ले जाने को कहा। वहां भर्ती नहीं लिया गया। दूसरे प्राइवेट अस्पताल ले जाते समय मरीज ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतक पीएसी में कांस्टेबल के पद पर गोरखपुर जिले में तैनात था। एसआईसी श्रीकृष्ण गोपाल सिंह ने कहा कि यहां सेट्रलाइज ऑक्सीजन की व्यवस्था है। ऑक्सीजन की पूरे अस्पताल में कहीं कोई कमी नहीं है। मरीज के परिजन स्वयं यह लिख कर गए है कि वह मरीज को कहीं और ले जा रहे है। परिजनों की लापरवाही से मरीज की मौत हुई है।