पुलिस पहुंची तो छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। देर शाम पुलिस ने हत्या की धारा में मुकदमा भी दर्ज किया। तीन अगस्त को प्रधानाचार्या सोनम मिश्रा व कक्षाध्यापक अभिषेक राय को गिरफ्तार भी कर लिया। यह अलग बात है कि विवेचना में हत्या की पुष्टि न होने पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धारा में दोनों की गिरफ्तारी हुई। इस बीच आठ अगस्त को प्राइवेट स्कूल संचालकों ने अपने-अपने स्कूल को बंद कर प्रधानाचार्या व शिक्षक की गिरफ्तारी का विरोध किया। वहीं आईजी ने जनपद पुलिस से घटना की विवेचना लेकर सीओ सिटी मऊ को जांच दे दी।
सीओ सिटी मऊ ने मात्र 24 घंटे में ही अपनी विवेचना पूरी करते हुए कोर्ट में 164 में अपनी रिपोर्ट देते हुए गिरफ्तार प्रधानाचार्या व शिक्षक को इस घटना में दोषी पाए जाने से इंकार कर दिया। जिस पर कोर्ट ने नौ अगस्त की देर शाम ही दोनों के रिहाई आदेश जारी कर दिए। इसके कुछ घंटे बाद ही नियम के विपरित रात 11 से साढ़े 11 बजे के बीच दोनों को जेल प्रशासन ने रिहा भी कर दिया। बच्ची की शुक्रवार को तेरहवीं थी। जिसके चलते परिजन भी विरोध नहीं कर पाए। शनिवार को छात्रा के माता-पिता के नेतृत्व में अभिभावक फिर से सड़क पर उतरे। जिलाधिकारी को पत्रक सौंपकर सीओ सिटी मऊ की विवेचना को सिरे से खारिज करते हुए आजमगढ़ पुलिस की विवेचना के आधार पर ही कार्रवाई आगे बढ़ाए जाने की मांग की।
छात्रा की मां ने कहा कि विद्यालय के लोग काफी बड़े लोग है। धनबल और बाहुबल के बल पर विवेचना को प्रभावित किया गया। अपनी ताकत दिखा कर मेरी बच्ची की मौत के बाद भी चीरहरण किया जा रहा है। सीओ सिटी मऊ न जाने किस दबाव में आजमगढ़ पुलिस की पूरी विवेचना को ही पलट दिए हैं। बेटी को न्याय दिलाने के लिए अब मैं सीएम योगी तक जाउंगी।
छात्रा के पिता ने कहा कि बेटी को न्याय दिलाने के लिए पिता ने भी कमर कस लिया है। आईजी जोन के निर्देश पर आजमगढ़ पुलिस से विवेचना मऊ पुलिस को सौंपे जाना पूरी तरह से गलत है। आजमगढ़ पुलिस की विवेचना पर हमें पूरा भरोसा था। जांच सही दिखा में चल रही थी। ऐसे में मऊ पुलिस को विवेचना देकर जांच को भटकाने का काम किया गया है। अब मैं हाईकोर्ट में गुहार लगाने के साथ ही शासन-प्रशासन से प्रकरण की सीबीआई जांच की भी मांग करता हूं।