रोते-बिलखते किशोरी की ये बातें सुनकर उसे ढाढस बंधाने वाले लोग भी फफक पड़ रहे हैं। शवों का अंतिम संस्कार तो रविवार रात हो गया लेकिन मातम का अंत अभी नहीं हुआ है। ये घटना अपने पीछे ढेर सारे सवाल छोड़ गई है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है।
कप्तानगंज थाना क्षेत्र के धंधारी गांव निवासी भानू प्रताप सिंह गांव के बाहर सड़क के किनारे मकान बनाकर परिवार के साथ रहते थे। उन्होंने शनिवार को पुत्र राजन सिंह (20) को चोरी के गेहूं बेचने पर डांटा था। इस बात से वह क्षुब्ध हो गया। उसने शनिवार की रात ही पिता भानू प्रताप सिंह (48), मां सुनीता देवी (45) और बहन राशि सिंह (13) वर्ष को कुल्हाड़ी से वार करके मार डाला।
गनर संदीप निषाद को अंतिम सलामी
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एक और बहन नानी के घर गई हुई थी। वारदात को अंजाम देने के बाद वह घर से फरार हो गया। आबादी से दूर सड़क किनारे मकान होने के कारण किसी को रात में परिवारवालों की चीख-पुकार सुनाई नहीं दी। सुबह गांव वाले टहलने निकले तो भानू प्रताप के घर पर सन्नाटा पसरा था। घर का दरवाजा खुला हुआ था। कुछ लोग परिवार के सदस्यों का हाल जानने भीतर गए और वहां का दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए।
घटनास्थल का मंजर देख लोग सहम उठे। घर में हर ओर खून ही खून था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। भानू प्रताप के बड़े भाई भूपति सिंह की तहरीर पर राजन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद शवों का राजघाट पर एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। भूपति सिंह ने ही शवों को मुखाग्नि दी।