वारदात को अंजाम देने के बाद वह घर से फरार हो गया। आबादी से दूर सड़क किनारे मकान होने के कारण किसी को रात में परिवारवालों की चीख-पुकार सुनाई नहीं दी। सुबह गांव वाले टहलने निकले तो भानू प्रताप के घर पर सन्नाटा पसरा था। घर का दरवाजा खुला हुआ था। कुछ लोग परिवार के सदस्यों का हाल जानने भीतर गए और वहां का दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। भानू प्रताप के बड़े भाई भूपति सिंह की तहरीर पर राजन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद शवों का राजघाट पर एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। भूपति सिंह ने ही शवों को मुखाग्नि दी।
शनिवार रात इस खौफनाक घटना के समय एक पुत्री रिश्तेदारी में गई थी। जिसके चलते वो कलयुगी भाई के हाथों बच गई। उसका रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं आरोपी युवक अभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। उसकी तलाश में पुलिस की दो टीम लगी हुई है।